
अमेरिका और जर्मनी के बीच कूटनीतिक संबंधों में एक बार फिर खटास देखने को मिली है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने जर्मनी में तैनात करीब 5000 अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाने का फैसला लिया है। इस निर्णय को दोनों देशों के बीच बढ़ते मतभेदों से जोड़कर देखा जा रहा है।
जर्मन चांसलर के बयान से बढ़ी नाराजगी
दरअसल, जर्मनी की चांसलर की ओर से हाल ही में दिया गया एक बयान विवाद की वजह बना। उन्होंने ईरान से जुड़े मुद्दे पर कहा था कि ईरान ने अमेरिका की बेइज्जती की है और इस पूरे मामले में अमेरिका की रणनीति भी प्रभावी साबित नहीं हुई। इस बयान के बाद ट्रम्प प्रशासन की नाराजगी खुलकर सामने आ गई।
सैन्य वापसी का फैसला, रणनीतिक संकेत
सूत्रों के मुताबिक, जर्मनी में तैनात अमेरिकी सैनिकों की संख्या में कटौती का यह फैसला सिर्फ सैन्य नहीं बल्कि राजनीतिक और रणनीतिक संदेश भी देता है। अमेरिका लंबे समय से नाटो सहयोगियों से रक्षा खर्च बढ़ाने की मांग करता रहा है, जिसमें जर्मनी प्रमुख रहा है।
पहले भी उठ चुके हैं ऐसे कदम
यह पहली बार नहीं है जब ट्रम्प ने जर्मनी से सैनिक हटाने का फैसला लिया हो। इससे पहले भी उन्होंने यूरोप में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति को कम करने के संकेत दिए थे। उनका मानना रहा है कि अमेरिका को अपने संसाधनों का इस्तेमाल घरेलू प्राथमिकताओं पर करना चाहिए।
अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बढ़ेगा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से नाटो की एकजुटता पर असर पड़ सकता है और यूरोप की सुरक्षा रणनीति में भी बदलाव देखने को मिल सकता है। साथ ही, अमेरिका और जर्मनी के रिश्तों में यह नया मोड़ आने वाले समय में वैश्विक राजनीति को प्रभावित कर सकता है।
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