तेहरान/वॉशिंगटन। मिडिल ईस्ट (Middle East) में जारी संघर्ष अब उस मुकाम पर पहुंच गया है, जहां से वापसी का रास्ता नजर नहीं आता। आसमान से बरसती मिसाइलों और ड्रोन हमलों के बीच अब खबर है कि अमेरिका और इजरायल, ईरान की धरती पर ‘जमीनी हमला’ (Ground Invasion) करने की प्रचंड तैयारी में हैं। अमेरिकी जंगी जहाजों से हजारों सैनिकों की तैनाती और दुनिया की सबसे खतरनाक मानी जाने वाली ’82nd एयरबोर्न डिवीजन’ की हलचल ने पूरी दुनिया की धड़कनें बढ़ा दी हैं। ईरान ने भी दोटूक चेतावनी दी है कि वह अपनी सीमाओं पर किसी भी घुसपैठ का जवाब ‘कयामत’ से देगा।
समंदर से जमीन तक घेराबंदी: 3500 अमेरिकी मरीन पहुंचे
यूएस सेंट्रल कमांड के अनुसार, अमेरिका ने अपने एम्फीबियस रेडीनेस ग्रुप के जरिए करीब 3500 मरीन और नाविकों को युद्धपोतों से मिडिल ईस्ट में तैनात कर दिया है। ये सैनिक समुद्र से सीधे जमीन पर हमला करने और मोर्चा संभालने में माहिर माने जाते हैं। ईरानी संसद के स्पीकर ने आरोप लगाया है कि एक तरफ अमेरिका कूटनीति का ढोंग कर रहा है, तो दूसरी तरफ गुपचुप तरीके से जमीनी हमले की साजिश रच रहा है।
पैराशूट से उतरेंगे शिकारी: 82nd एयरबोर्न डिवीजन का खौफ
पेंटागन की सबसे घातक यूनिट ’82nd एयरबोर्न डिवीजन’ को भी मोर्चे पर भेजा जा रहा है। इस डिवीजन की खासियत यह है कि इसके जांबाज महज 18 घंटे के भीतर दुनिया के किसी भी कोने में पैराशूट के जरिए उतरकर दुश्मन का सफाया शुरू कर सकते हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पेंटागन अब स्पेशल फोर्सेस के साथ मिलकर ईरान के भीतर सर्जिकल स्ट्राइक या बड़े जमीनी ऑपरेशन के विकल्पों पर विचार कर रहा है।
ईरान की ‘फौलादी’ तैयारी: सीमाओं पर बढ़ाई सैन्य ताकत
अमेरिका की इस घेराबंदी का जवाब देने के लिए ईरान ने भी अपनी पश्चिमी और दक्षिणी सीमाओं पर सैन्य जमावड़ा तेज कर दिया है। ईरान ने अपनी मिसाइल यूनिट्स को ‘लॉन्च मोड’ पर रखने के साथ-साथ इन्फैंट्री (पैदल सेना) को भी अलर्ट कर दिया है। ईरानी कमांडरों का दावा है कि उनकी धरती पर कदम रखने वाला कोई भी विदेशी सैनिक वापस जिंदा नहीं जाएगा। ट्रंप प्रशासन के दावों के बावजूद कि बातचीत चल रही है, जमीनी हालात कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं।
दुनिया पर संकट: तेल की कीमतों में लगी आग
महीने भर से ज्यादा समय से जारी इस जंग ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिला कर रख दिया है। अगर यह संघर्ष पूर्णकालिक जमीनी युद्ध में बदलता है, तो कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं, जिसका सीधा असर भारत समेत पूरी दुनिया की जेब पर पड़ेगा। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या कूटनीति इस विनाशकारी युद्ध को रोक पाएगी या इतिहास का एक और रक्तरंजित अध्याय लिखा जाएगा।
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