सह्याद्रि की गोद में बसे भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग का रहस्य: जहां शिव ने राक्षस का किया संहार, वहीं से निकली पवित्र भीमा नदी

महाराष्ट्र के पुणे जिले की सह्याद्रि पहाड़ियों में स्थित भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों में छठा स्थान रखता है। घने जंगलों और प्राकृतिक सौंदर्य से घिरा यह धार्मिक स्थल न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि रोमांच और शांति का अद्भुत संगम भी प्रस्तुत करता है। इसे ‘मोटेश्वर महादेव’ के नाम से भी जाना जाता है और यह भीमा नदी के उद्गम स्थल के रूप में भी प्रसिद्ध है।

कहां स्थित है भीमाशंकर धाम

भीमाशंकर मंदिर पुणे से करीब 110-120 किलोमीटर दूर खेड़ क्षेत्र के पास सह्याद्रि पर्वतमाला में स्थित है। पहाड़ों और हरियाली के बीच बसा यह स्थान श्रद्धालुओं और प्रकृति प्रेमियों दोनों को आकर्षित करता है।

12 ज्योतिर्लिंगों में विशेष महत्व

धार्मिक मान्यता के अनुसार, भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग मोक्ष प्रदान करने वाला और व्यक्ति के अहंकार का नाश करने वाला माना जाता है। देशभर से लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं, खासकर सावन के महीने में यहां भारी भीड़ उमड़ती है।

पौराणिक कथा: जब शिव ने किया राक्षस का अंत

शिव पुराण के अनुसार, इस स्थान पर भगवान शिव ने त्रिपुरासुर और भीम नामक राक्षस का वध किया था। कथा के मुताबिक, युद्ध के दौरान शिवजी के शरीर से निकले पसीने से ही पवित्र भीमा नदी का जन्म हुआ, जो आज भी इस क्षेत्र की जीवनरेखा मानी जाती है।

मंदिर की वास्तुकला में दिखता मराठा काल का प्रभाव

भीमाशंकर मंदिर की वास्तुकला नागर शैली में बनी हुई है, जो प्राचीन भारतीय स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण है। मंदिर के विकास और संरक्षण में मराठा शासकों, विशेषकर नाना फडणवीस का महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है।

घूमने का सही समय और यात्रा अनुभव

अगर आप भीमाशंकर जाने की योजना बना रहे हैं तो अक्टूबर से मार्च का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है। हालांकि सावन के दौरान यहां की धार्मिक ऊर्जा चरम पर होती है, लेकिन भीड़ भी काफी अधिक रहती है। यह स्थान ट्रेकिंग और आध्यात्मिक यात्रा दोनों के लिए बेहतरीन विकल्प है।

आसपास के आकर्षण भी हैं खास

भीमाशंकर के आसपास कई दर्शनीय स्थल मौजूद हैं, जिनमें भीमाशंकर वन्यजीव अभयारण्य प्रमुख है, जहां दुर्लभ ‘शेकरू’ (विशाल गिलहरी) पाई जाती है। इसके अलावा हनुमान झील और गुप्त भीमाशंकर जैसे स्थान भी पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।भीमाशंकर की यात्रा न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करती है, बल्कि प्रकृति के करीब ले जाकर मन को सुकून भी देती है।

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