
चार धाम यात्रा 2026 के तहत श्रद्धालुओं के लिए बड़ी खुशखबरी है। उत्तराखंड स्थित पवित्र बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल की सुबह 6 बजकर 15 मिनट पर विधि-विधान के साथ खोल दिए जाएंगे। मंदिर खुलते ही भक्तों को भगवान विष्णु के दिव्य स्वरूप के दर्शन का अवसर मिलेगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार, बद्रीनाथ धाम के दर्शन करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है और पहले दिन के दर्शन विशेष रूप से ‘दिव्य दर्शन’ माने जाते हैं।
चार धाम यात्रा में बद्रीनाथ का विशेष महत्व
केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के बाद अब बद्रीनाथ धाम के उद्घाटन के साथ चार धाम यात्रा और भी गति पकड़ रही है। बद्रीनाथ को भगवान विष्णु का धाम माना जाता है, जहां दर्शन करने से विष्णु लोक की प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है। हर साल लाखों श्रद्धालु इस पावन धाम की यात्रा करते हैं और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करते हैं।
देव डोलियों के साथ शुरू हुई पवित्र यात्रा
21 अप्रैल को ज्योतिर्मठ स्थित नृसिंह मंदिर से पूजा-अर्चना के बाद आदि गुरु शंकराचार्य की पवित्र गद्दी, श्री गरुड़जी की उत्सव मूर्ति और देव डोलियां वैदिक मंत्रोच्चार के बीच बद्रीनाथ धाम के लिए रवाना हुईं। इस दौरान मंदिर समिति के पदाधिकारी और रावल अमरनाथ नंबूदरी भी मौजूद रहे। यात्रा का पहला पड़ाव योग बदरी पांडुकेश्वर रहा, जहां श्रद्धालुओं ने भव्य स्वागत किया।
पहले दिन क्यों खास होते हैं ‘दिव्य दर्शन’?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बद्रीनाथ मंदिर के कपाट हर साल करीब 6 महीने तक बंद रहते हैं। इस दौरान मंदिर के भीतर अखंड दीप जलता रहता है और देवता स्वयं पूजा करते हैं। यही कारण है कि कपाट खुलने के बाद पहले दिन जो दर्शन होते हैं, उन्हें ‘दिव्य दर्शन’ कहा जाता है। भक्तों के बीच इन दर्शनों को लेकर विशेष आस्था और उत्साह देखने को मिलता है।
तैयारियां पूरी, श्रद्धालुओं में उत्साह चरम पर
बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अनुसार, यात्रा को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। 22 अप्रैल को योग बदरी पांडुकेश्वर से श्री उद्धव और कुबेर जी की मूर्तियां आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी के साथ बद्रीनाथ धाम पहुंचेंगी। इससे पहले गरुड़जी की मूर्ति पहले ही धाम पहुंच चुकी है।
इसके अलावा, ज्योतिर्मठ में तिमुंडिया वीर पूजन और गरुड़ छाड़ मेला आयोजित कर यात्रा के सफल संचालन की कामना की गई। स्थानीय लोगों, छात्रों और श्रद्धालुओं ने देव डोलियों का फूलों की वर्षा से भव्य स्वागत किया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
तेल कलश और परंपराओं का विशेष महत्व
डिमरी धार्मिक केंद्रीय पंचायत के प्रतिनिधि तेल कलश (गाडू घड़ा) के साथ ज्योतिर्मठ पहुंचे, जिसे 22 अप्रैल को बद्रीनाथ धाम ले जाया गया। यह परंपरा मंदिर की प्राचीन धार्मिक रीति-रिवाजों का अहम हिस्सा मानी जाती है। इस अवसर पर मंदिर समिति के कई अधिकारी, पुजारी और स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे |
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