
टीवी इतिहास के सबसे चर्चित धारावाहिकों में से एक ‘रामायण’ आज भी दर्शकों के दिलों में खास जगह रखता है। सीमित संसाधनों और तकनीक के दौर में भी इस शो ने ऐसे दृश्य रचे, जिन्हें देखकर लोग आज भी हैरान रह जाते हैं। खासकर पुष्पक विमान का दृश्य, जिसने उस समय के दर्शकों को चौंका दिया था। सवाल यह उठता है कि आखिर बिना आधुनिक VFX के उस दौर में यह चमत्कार कैसे संभव हुआ।
सीमित संसाधनों में रचा गया भव्य दृश्य
जब ‘रामायण’ की शूटिंग हो रही थी, तब आज जैसी एडवांस तकनीक उपलब्ध नहीं थी। इसके बावजूद रामानंद सागर और उनकी टीम ने अपनी क्रिएटिविटी और देसी तकनीकों का सहारा लेकर पुष्पक विमान जैसे दृश्यों को साकार किया। यह कोई डिजिटल इफेक्ट नहीं, बल्कि कैमरा एंगल, सेट डिजाइन और साधारण मैकेनिकल तकनीकों का शानदार मिश्रण था।
ऐसे तैयार किया गया पुष्पक विमान
पुष्पक विमान के निर्माण के लिए हल्के मटेरियल का इस्तेमाल किया गया था, ताकि उसे आसानी से मूव कराया जा सके। इसे एक प्लेटफॉर्म पर बनाया गया, जिसे रस्सियों और पुली सिस्टम की मदद से ऊपर-नीचे किया जाता था। इस दौरान कैमरे को इस तरह सेट किया जाता था कि दर्शकों को यह उड़ता हुआ विमान नजर आए।
शूटिंग में अपनाया गया खास जुगाड़
शूटिंग के दौरान ब्लू स्क्रीन जैसी सुविधा नहीं थी, इसलिए बैकग्राउंड के लिए पेंटेड पर्दों और मिनिएचर मॉडल्स का इस्तेमाल किया गया। कैमरे की स्पीड, एंगल और एडिटिंग तकनीक से यह भ्रम पैदा किया गया कि विमान आसमान में उड़ रहा है। कई बार स्लो मोशन और मल्टी-लेयर शूटिंग का भी सहारा लिया गया।
दर्शकों पर पड़ा गहरा असर
उस दौर में दर्शकों के लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं था। हर रविवार लोग टीवी के सामने बैठकर इन दृश्यों का इंतजार करते थे। पुष्पक विमान का दृश्य खास तौर पर चर्चा का विषय बन गया था और इसने शो की लोकप्रियता को और बढ़ा दिया।
आज भी मिसाल है यह क्रिएटिविटी
आज के हाईटेक दौर में जहां VFX और CGI का बोलबाला है, वहीं ‘रामायण’ में दिखाए गए ऐसे दृश्य इस बात का प्रमाण हैं कि सीमित संसाधनों में भी बेहतरीन काम किया जा सकता है। रामानंद सागर की यह सोच और जुगाड़ आज भी फिल्ममेकर्स के लिए प्रेरणा बनी हुई है।
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