प्रभु की शरणागति का अर्थ: जब अहंकार समाप्त होता है सनातन धर्म और भक्ति मार्ग में प्रभु की शरणागति को आध्यात्मिक जीवन का सर्वोच्च चरण माना गया है। शरणागति का वास्तविक अर्थ केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि अपने अहंकार, स्वार्थ और व्यक्तिगत इच्छाओं का त्याग करके स्वयं को पूर्ण रूप से ईश्वर की इच्छा के अधीन कर देना …
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मृत्यु के बाद आत्मा को तय करनी पड़ती है 86 हजार योजन की भयावह यात्रा! नारद पुराण में वर्णित यमलोक का रहस्य जान कांप उठेगा मन
सनातन धर्म के प्रमुख ग्रंथों में शामिल नारद पुराण में जीवन, मृत्यु, लोक-परलोक और कर्मों के फल का विस्तार से वर्णन मिलता है। इस पुराण के अनुसार मनुष्य का हर कर्म मृत्यु के बाद उसके भविष्य को तय करता है। यही कारण है कि व्यक्ति के मन में अक्सर यह प्रश्न उठता है कि मृत्यु के बाद आत्मा कहां जाती …
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