नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में बारूद की गंध तेज हो गई है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। डोनल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाली अमेरिकी सरकार द्वारा क्षेत्र में सैन्य मौजूदगी बढ़ाने के बाद अब युद्ध की आशंका गहरा गई है। हालात की गंभीरता को देखते हुए भारत, ब्रिटेन और चीन समेत दुनिया के कई शक्तिशाली देशों ने अपने नागरिकों के लिए ‘ट्रैवल एडवाइजरी’ जारी कर उन्हें जल्द से जल्द ईरान और इजरायल छोड़ने की सलाह दी है।
भारत ने कहा- ‘जो भी साधन मिले, तुरंत निकलें’
तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों के लिए सख्त चेतावनी जारी की है। एडवाइजरी में कहा गया है कि नागरिक उपलब्ध किसी भी साधन का उपयोग कर तुरंत ईरान छोड़ दें। सरकार ने आने वाले दिनों में स्थिति और बिगड़ने की आशंका जताई है, जिससे निकासी प्रक्रिया (Evacuation) में बाधा आ सकती है।
ब्रिटेन ने बुलाए राजनयिक, अमेरिका ने खाली कराए दफ्तर
तनाव का असर राजनयिक स्तर पर भी दिखने लगा है। यूनाइटेड किंगडम (UK) ने सुरक्षा खतरों के मद्देनजर तेहरान से अपने दूतावास कर्मचारियों को अस्थायी रूप से वापस बुला लिया है। वहीं, इजरायल के यरुशलम में स्थित अमेरिकी दूतावास ने गैर-जरूरी अधिकारियों और उनके परिवारों को देश छोड़ने की अनुमति दे दी है। ओमान इस संकट को टालने के लिए मध्यस्थता कर रहा है, लेकिन फिलहाल कोई ठोस समझौता होता नहीं दिख रहा है।
इन देशों ने भी जारी किया ‘रेड अलर्ट’
दुनिया भर के देशों में अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर अफरा-तफरी का माहौल है:
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चीन: अपने नागरिकों को ईरान की यात्रा से बचने और इजरायल में मौजूद लोगों को आपात स्थिति के लिए तैयार रहने को कहा है।
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जर्मनी: दूतावास ने चेतावनी दी है कि हवाई क्षेत्र (Airspace) कभी भी बंद हो सकता है, जिससे उड़ानें रद्द हो जाएंगी।
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पोलैंड और स्वीडन: दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने स्पष्ट कहा है कि संघर्ष की संभावना बहुत वास्तविक है, इसलिए बाद का इंतजार न करें और अभी निकलें।
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दक्षिण कोरिया और सर्बिया: इन्होंने भी अपनी सभी प्रस्तावित यात्राएं रद्द कर नागरिकों को तुरंत लौटने का निर्देश दिया है।
अगला हफ्ता होगा बेहद निर्णायक
वॉशिंगटन में ओमान के विदेश मंत्री और अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के बीच मुलाकातों का दौर जारी है। अगले हफ्ते वियना में अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बातचीत होनी है। अगर यह वार्ता विफल रहती है, तो मिडिल ईस्ट में एक बड़ा सैन्य टकराव टाला जाना मुश्किल होगा। जर्मनी के विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान की सुरक्षा स्थिति इस वक्त ‘बेहद अस्थिर’ है।
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