
काठमांडू: नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह (बालेन शाह) अपने ही बनाए एक महत्वपूर्ण नियम से पीछे हटते नजर आ रहे हैं। करीब तीन महीने पहले विदेशी राजदूतों से मुलाकात को लेकर अपनाई गई नीति के विपरीत अब उन्होंने भारत और चीन के राजदूतों से अलग-अलग मुलाकात करने का फैसला किया है। नेपाली मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, यह कदम नेपाल की संतुलित विदेश नीति और दोनों पड़ोसी देशों के साथ समान संबंध बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
भारत और चीन के राजदूतों से अलग-अलग होगी बैठक
जानकारी के मुताबिक, प्रधानमंत्री बालेन शाह भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव और चीन के राजदूत झांग माओमिंग से अलग-अलग मुलाकात करेंगे। दोनों देशों के प्रतिनिधियों के साथ होने वाली ये बैठकें एक ही दिन आयोजित किए जाने की तैयारी है। सरकार का मानना है कि इस तरीके से दोनों देशों के प्रति समान सम्मान और संतुलित कूटनीतिक संदेश दिया जा सकेगा।
एक ही दिन बैठक का फैसला क्यों लिया गया?
नेपाल सरकार के सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री बालेन शाह नहीं चाहते थे कि भारत या चीन में से किसी एक को यह संदेश जाए कि दूसरे देश को अधिक प्राथमिकता दी जा रही है। इसी वजह से दोनों देशों के राजदूतों के साथ अलग-अलग लेकिन एक ही दिन लगातार बैठकें करने की योजना बनाई गई है। इसे नेपाल की संतुलित विदेश नीति का अहम संकेत माना जा रहा है।
तीन महीने पहले अपनाई थी अलग नीति
बालेन शाह ने कुछ महीने पहले विदेशी राजदूतों से मुलाकात के संबंध में एक नई कार्यशैली अपनाई थी, जिसके तहत व्यक्तिगत बैठकों को लेकर सख्त रुख दिखाई दिया था। हालांकि अब मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने अपने उसी फैसले में बदलाव किया है। राजनीतिक जानकार इसे नेपाल की बदलती कूटनीतिक प्राथमिकताओं और क्षेत्रीय संतुलन की जरूरत से जोड़कर देख रहे हैं।
नेपाल सरकार ने बैठकों की पुष्टि की
नेपाल सरकार ने पुष्टि की है कि भारत और चीन के राजदूतों के साथ प्रधानमंत्री की अलग-अलग बैठकें इसी सप्ताह आयोजित की जाएंगी। हालांकि अभी तक इन बैठकों की आधिकारिक तारीख सार्वजनिक नहीं की गई है। नेपाल का विदेश मंत्रालय फिलहाल इन उच्चस्तरीय बैठकों की तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटा हुआ है।
नेपाल की विदेश नीति पर रहेगी नजर
भारत और चीन, नेपाल के सबसे महत्वपूर्ण पड़ोसी और रणनीतिक साझेदार हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री बालेन शाह की इन बैठकों पर क्षेत्रीय राजनीति और कूटनीतिक हलकों की खास नजर रहेगी। माना जा रहा है कि इन मुलाकातों से नेपाल दोनों देशों के साथ संतुलित और व्यावहारिक संबंध बनाए रखने का स्पष्ट संदेश देना चाहता है।
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