स्नेहा वाघ ने अपनाई कृष्ण भक्ति, दो टूटी शादियों के बाद बदली जिंदगी, बोलीं- अब रिश्तों के लिए इंसानों की जरूरत नहीं

टीवी की चर्चित अभिनेत्री स्नेहा वाघ इन दिनों अपनी एक्टिंग के साथ-साथ आध्यात्मिक जीवन को लेकर भी सुर्खियों में हैं। ‘ज्योति’, ‘वीरा’ और ‘नीरजा एक नई पहचान’ जैसे टीवी शोज में अपनी पहचान बनाने वाली स्नेहा अब मुंबई की भागदौड़ से दूर मथुरा और वृंदावन में ज्यादा समय बिता रही हैं। अभिनेत्री ने खुद बताया है कि श्रीकृष्ण की भक्ति से उन्हें वह सुकून और निस्वार्थ प्रेम मिला, जिसकी तलाश वह लंबे समय से कर रही थीं।

दो शादियां टूटीं, फिर अध्यात्म की ओर बढ़ीं

स्नेहा वाघ की निजी जिंदगी काफी उतार-चढ़ाव भरी रही है। अभिनेत्री ने दो बार शादी की, लेकिन दोनों रिश्ते ज्यादा समय तक नहीं चल सके। इन अनुभवों के बाद स्नेहा ने अपनी जिंदगी को एक अलग दिशा देने का फैसला किया। अब उनका झुकाव आध्यात्म और श्रीकृष्ण की भक्ति की ओर काफी बढ़ गया है।

स्नेहा फिलहाल एक्टिंग की दुनिया में सक्रिय हैं और टीवी शो ‘महादेव एंड सन्स’ में नजर आ रही हैं। शो के प्रमोशन के सिलसिले में वह हाल ही में लखनऊ पहुंची थीं। इसी दौरान उन्होंने अपनी आध्यात्मिक यात्रा और वृंदावन से अपने जुड़ाव को लेकर खुलकर बात की।

मथुरा-वृंदावन में बीत रहा ज्यादा वक्त

अभिनेत्री के मुताबिक, अब मुंबई की तुलना में उनका काफी समय मथुरा के छटिकारा और वृंदावन में गुजरता है। स्नेहा ने बताया कि उनका वृंदावन से जुड़ाव अचानक नहीं हुआ, बल्कि उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे वहां से उन्हें बुलावा आया हो। इसके बाद धीरे-धीरे श्रीकृष्ण के प्रति उनकी आस्था और गहरी होती चली गई।

स्नेहा का कहना है कि कृष्ण से जुड़ने के बाद उनकी जिंदगी में एक ऐसा बदलाव आया, जिसे शब्दों में बयान करना उनके लिए आसान नहीं है। उन्हें भीतर से शांति महसूस होने लगी और जीवन को देखने का नजरिया भी बदल गया।

‘अब रिश्तों के लिए इंसानों की जरूरत नहीं’

स्नेहा वाघ ने अपनी बात रखते हुए कहा कि अब उन्हें खुशी, प्रेम या मानसिक सुकून के लिए किसी दूसरे इंसान पर निर्भर रहने की जरूरत महसूस नहीं होती। श्रीकृष्ण से उन्हें ऐसा प्यार मिला है, जिसमें किसी तरह की शर्त नहीं है।

अभिनेत्री के मुताबिक, लंबे समय से जिस निस्वार्थ और बिना शर्त प्यार की तलाश उन्हें थी, वह उन्हें कृष्ण की भक्ति में मिला। यही वजह है कि अब वह अपने जीवन में रिश्तों को लेकर पहले जैसी निर्भरता महसूस नहीं करतीं।

कृष्ण भक्ति ने बदला जिंदगी को देखने का नजरिया

स्नेहा के लिए आध्यात्म अब केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है। वह इसे अपने जीवन में शांति और संतुलन पाने का माध्यम मानती हैं। वृंदावन और मथुरा में समय बिताने से उन्हें अपने भीतर झांकने और जिंदगी को नए नजरिए से समझने का मौका मिल रहा है।दो असफल शादियों और निजी जिंदगी के मुश्किल दौर से गुजरने के बाद स्नेहा ने जिस तरह आध्यात्म को अपनाया है, वह उनकी जिंदगी के एक नए अध्याय की ओर इशारा करता है। एक्टिंग के साथ अब कृष्ण भक्ति भी उनके जीवन का अहम हिस्सा बन चुकी है।

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