
मुंबई: रामानंद सागर की ऐतिहासिक टीवी सीरियल ‘रामायण’ में लक्ष्मण का किरदार निभाकर घर-घर में लोकप्रिय हुए अभिनेता सुनील लहरी एक बार फिर चर्चा में हैं। अभिनेता अक्सर भारतीय संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक मुद्दों से जुड़े विषयों पर अपनी राय साझा करते रहते हैं। इस बार उन्होंने भारतीय संस्कृति में अभिवादन के लिए इस्तेमाल होने वाले तीन बेहद आम शब्दों—नमस्ते, नमस्कार और प्रणाम—के बीच का अंतर समझाया है।
सुनील लहरी ने बताया तीनों शब्दों का अलग अर्थ
सुनील लहरी ने हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो साझा किया। इस वीडियो में उन्होंने भारतीय संस्कृति में अभिवादन के इन पारंपरिक तरीकों का जिक्र करते हुए बताया कि भले ही नमस्ते, नमस्कार और प्रणाम सुनने में अभिवादन के शब्द लगते हैं, लेकिन भारतीय परंपरा में इनके इस्तेमाल का संदर्भ अलग-अलग माना जाता है।
अभिनेता ने बताया कि ‘नमस्ते’ का इस्तेमाल हमउम्र लोगों या अपने से छोटे लोगों के अभिवादन के लिए किया जाता है। वहीं, ‘नमस्कार’ का प्रयोग एक से अधिक लोगों का अभिवादन करते समय किया जाता है। इसके अलावा ‘प्रणाम’ का संबंध अपने से बड़ों के सम्मान और अभिवादन से है।
‘आप सब मेरे लिए इन तीनों में आते हैं’
अपने वीडियो में सुनील लहरी ने बेहद सहज अंदाज में इन शब्दों का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि प्रणाम, नमस्ते और नमस्कार भारतीय संस्कृति में अभिवादन के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं और इन तीनों के अर्थ अलग-अलग हैं।
उन्होंने अपने दर्शकों से जुड़ते हुए कहा कि उनके लिए उनके चाहने वाले इन तीनों श्रेणियों में आते हैं, इसलिए वह सभी को नमस्ते, नमस्कार और प्रणाम कहते हैं। सुनील लहरी का यह अंदाज सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच रहा है।
‘रामायण’ के लक्ष्मण आज भी दर्शकों के बीच लोकप्रिय
सुनील लहरी को भारतीय टेलीविजन के सबसे चर्चित कलाकारों में गिना जाता है। रामानंद सागर की ‘रामायण’ में उन्होंने लक्ष्मण की भूमिका निभाई थी। इस किरदार ने उन्हें देशभर में अलग पहचान दिलाई और आज भी दर्शक उन्हें लक्ष्मण के नाम से याद करते हैं।
अभिनेता समय-समय पर सोशल मीडिया के जरिए अपने विचार और पुराने अनुभव दर्शकों के साथ साझा करते रहते हैं। इससे पहले वह जेन जी यानी Gen Z और नई पीढ़ी से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी बात रख चुके हैं।
भारतीय संस्कृति के शब्दों में छिपा सम्मान का भाव
भारत में अभिवादन की परंपरा केवल किसी व्यक्ति से मिलने या विदा होने तक सीमित नहीं मानी जाती। अलग-अलग शब्दों और मुद्राओं के जरिए सामने वाले के प्रति सम्मान, अपनापन और आदर व्यक्त किया जाता है। सुनील लहरी ने इसी सांस्कृतिक पहलू को अपने वीडियो के माध्यम से सामने रखा है।उनकी बात ने एक बार फिर यह चर्चा छेड़ दी है कि रोजमर्रा की बातचीत में इस्तेमाल होने वाले सामान्य शब्दों के पीछे भारतीय परंपरा और संस्कृति से जुड़े कितने गहरे भाव मौजूद हैं।
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