
पश्चिम बंगाल के सिंगूर में टाटा समूह की संभावित वापसी को लेकर हलचल तेज हो गई है। उद्योग मंत्री ने शुरुआती बातचीत की पुष्टि की है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी खुद पूरे मामले की निगरानी कर रहे हैं, जबकि वर्षों से प्रभावित किसान नई उम्मीद के साथ फैसले का इंतजार कर रहे हैं।
Singur Tata Plant: दो दशक बाद फिर चर्चा में सिंगूर, टाटा की वापसी पर बढ़ी हलचल
पश्चिम बंगाल के सिंगूर में लगभग 20 साल पहले टाटा समूह की नैनो परियोजना को लेकर शुरू हुआ विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। राज्य में भाजपा सरकार बनने के बाद सिंगूर में टाटा समूह की संभावित वापसी को लेकर राजनीतिक और औद्योगिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। इस संभावित कदम को राज्य के औद्योगिक विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
उद्योग मंत्री बोले- टाटा से शुरुआती स्तर पर बातचीत जारी
राज्य के उद्योग मंत्री तापस रॉय ने संकेत दिए हैं कि टाटा समूह के साथ शुरुआती स्तर पर बातचीत चल रही है। उन्होंने कहा कि यदि टाटा समूह सिंगूर लौटने के लिए सहमत होता है, तो सरकार वहां किसी अन्य कंपनी को स्थापित नहीं करेगी। मंत्री के अनुसार, इस पूरे मामले की निगरानी मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी स्वयं कर रहे हैं और सरकार औद्योगिक निवेश को लेकर गंभीरता से काम कर रही है।
ममता बनर्जी के आंदोलन के बाद बंद हुई थी नैनो परियोजना
सिंगूर का नाम वर्ष 2006 में उस समय पूरे देश में चर्चा का विषय बना था, जब टाटा मोटर्स की नैनो कार परियोजना के लिए किसानों की जमीन का अधिग्रहण किया गया। इस अधिग्रहण का तत्कालीन विपक्ष की नेता ममता बनर्जी ने जोरदार विरोध किया था। लंबे आंदोलन और राजनीतिक विवाद के बाद टाटा समूह ने सिंगूर से अपनी नैनो परियोजना वापस लेने का फैसला किया, जिससे राज्य में प्रस्तावित बड़ा औद्योगिक निवेश रुक गया।
हजारों परिवार अब भी झेल रहे हैं फैसले का असर
टाटा परियोजना बंद होने का असर केवल उद्योग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि हजारों किसान परिवार भी इससे प्रभावित हुए। जिन किसानों ने परियोजना के लिए अपनी जमीन दी थी, वे आज भी आर्थिक और मानसिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, करीब 3,600 प्रभावित परिवारों को सरकार हर महीने 2,000 रुपये की आर्थिक सहायता और 16 किलो चावल उपलब्ध कराती है। इसके बावजूद कई परिवारों का कहना है कि वे आज भी उस दौर के नुकसान से पूरी तरह उबर नहीं पाए हैं।
किसानों में फिर जगी उम्मीद, जमीन देने को तैयार लोग
सिंगूर के कई किसान अब टाटा समूह की संभावित वापसी को नई शुरुआत के रूप में देख रहे हैं। 75 वर्षीय अंगूर दास का कहना है कि उनके पति ने नैनो परियोजना के लिए छह बीघा जमीन दी थी। उनका मानना है कि यदि टाटा समूह दोबारा आता है तो क्षेत्र में रोजगार और आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी, जिससे स्थानीय लोगों को फिर से विकास का अवसर मिल सकता है।
सरकार के अगले कदम पर टिकी सभी की नजर
फिलहाल टाटा समूह की वापसी को लेकर कोई आधिकारिक अंतिम घोषणा नहीं हुई है। हालांकि सरकार और टाटा समूह के बीच शुरुआती बातचीत की पुष्टि के बाद सिंगूर के लोगों, किसानों और उद्योग जगत की निगाहें आगे होने वाले फैसलों पर टिकी हुई हैं। यदि यह प्रस्ताव आगे बढ़ता है तो करीब दो दशक बाद सिंगूर एक बार फिर देश के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में शामिल होने की दिशा में कदम बढ़ा सकता है।
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