
उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में जहां मानसून की रफ्तार धीमी पड़ गई है, वहीं पहाड़ी राज्यों में भारी बारिश आफत बनकर बरस रही है। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में शनिवार रात बादल फटने के बाद अचानक आई बाढ़ ने जनजीवन प्रभावित कर दिया। तेज बहाव में सड़क बह गई और कई खेतों को नुकसान पहुंचा। दूसरी ओर उत्तराखंड के विकासनगर में लगातार हो रही बारिश के कारण लखवाड़ हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के पास लैंडस्लाइड हो गया, जिससे कई वाहन और निर्माण कार्य में लगी मशीनें मलबे में दब गईं।
पहलगाम में बादल फटने से आई बाढ़, सड़क और खेतों को भारी नुकसान
शनिवार देर रात पहलगाम क्षेत्र में बादल फटने के बाद अचानक पानी का तेज बहाव आया। इससे कई खेत जलमग्न हो गए और एक सड़क पूरी तरह बह गई। स्थानीय प्रशासन ने प्रभावित इलाकों का जायजा लिया और हालात पर नजर बनाए रखी है। राहत और बचाव से जुड़ी टीमें भी सतर्क हैं।
उत्तराखंड में लैंडस्लाइड, मलबे में दबी कई गाड़ियां और मशीनें
उत्तराखंड के विकासनगर में भारी बारिश के चलते लखवाड़ हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के समीप पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा और चट्टानें नीचे आ गईं। लैंडस्लाइड की चपेट में आने से कई वाहन और निर्माण कार्य में इस्तेमाल होने वाली मशीनें मलबे में दब गईं। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है।
देश के 70% हिस्से से मानसून के बादल गायब, सूखी हवाएं बनी बड़ी वजह
इस बीच देश के अधिकांश मैदानी इलाकों में मानसून कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, देश के लगभग 70 प्रतिशत हिस्से से मानसूनी बादल फिलहाल गायब हैं। इसकी प्रमुख वजह पाकिस्तान की ओर से आने वाली सूखी हवाएं बताई जा रही हैं।
मौसम से जुड़ी संस्था ऑल इंडिया वेदर की रिपोर्ट के मुताबिक, ये सूखी हवाएं अरब सागर, मध्य भारत और दक्षिण भारत तक फैल चुकी हैं। इसी कारण राजस्थान, दिल्ली-एनसीआर, पश्चिमी मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र में अगले पांच दिनों तक अच्छी बारिश की संभावना बेहद कम बनी हुई है।
बारिश थमने से बढ़ा तापमान, राजस्थान में पारा 42 डिग्री के पार
बारिश की गतिविधियां कमजोर होने का असर तापमान पर भी साफ दिखाई दे रहा है। मध्य प्रदेश, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश समेत कई इलाकों में गर्मी फिर बढ़ने लगी है। राजस्थान के श्रीगंगानगर में शनिवार को अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जिससे लोगों को उमस और गर्मी दोनों का सामना करना पड़ा।
IMD ने बताया क्यों कमजोर पड़ा मानसून
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, मानसून की रफ्तार धीमी पड़ने की सबसे बड़ी वजह मानसून को सक्रिय रखने वाले मौसम तंत्र का कमजोर होना है। 9 जुलाई के बाद बंगाल की खाड़ी में कोई मजबूत लो-प्रेशर सिस्टम विकसित नहीं हुआ, जिससे मानसूनी हवाओं को पर्याप्त नमी नहीं मिल सकी।
इसके अलावा मानसून ट्रफ भी अपनी सामान्य स्थिति से उत्तर की ओर खिसक गई है। इसी कारण मध्य, पश्चिम और दक्षिण भारत के बड़े हिस्सों में बादल बनने और बारिश होने की गतिविधियां काफी कम हो गई हैं। फिलहाल अच्छी बारिश मुख्य रूप से उत्तर भारत के कुछ हिस्सों, पूर्वी राज्यों और पूर्वोत्तर भारत तक सीमित है।
प्रशांत महासागर में बन रहे तीन नए सिस्टम से बढ़ी उम्मीद
मौसम विभाग का कहना है कि प्रशांत महासागर में तीन नए मौसम तंत्र विकसित हो रहे हैं। यदि इनमें से कोई एक सिस्टम बंगाल की खाड़ी तक पहुंचने में सफल रहता है तो मानसून को फिर से मजबूती मिल सकती है। ऐसे में आने वाले दिनों में देश के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां दोबारा बढ़ने की संभावना बन सकती है। हालांकि फिलहाल अगले कुछ दिनों तक अधिकांश राज्यों में मानसून के फिर से पूरी तरह सक्रिय होने के संकेत कमजोर बताए जा रहे हैं।
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