पाकिस्तान में सनसनी: क्या तालिबान के ड्रोन पहुंच गए परमाणु ठिकानों तक? पूर्व पाकिस्तानी आर्मी अफसर का चौंकाने वाला दावा

इस्लामाबाद/काबुल। पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बड़ा और बेहद गंभीर सवाल खड़ा हो गया है। एक पूर्व पाकिस्तानी सेना अधिकारी ने दावा किया है कि तालिबान से जुड़े ड्रोन पाकिस्तान के संवेदनशील इलाकों, यहां तक कि परमाणु प्रतिष्ठानों के आसपास तक पहुंच चुके हैं। इस बयान के सामने आने के बाद सुरक्षा हलकों में हलचल तेज हो गई है और सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर बहस छिड़ गई है।

पूर्व सैन्य अधिकारी का दावा, बढ़ी चिंता

पाकिस्तान की सेना से जुड़े एक रिटायर्ड अधिकारी ने हालिया बातचीत में कहा कि अफगान सीमा से लगे इलाकों में ड्रोन गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। उनका कहना है कि ये ड्रोन केवल निगरानी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि संवेदनशील सैन्य और रणनीतिक ठिकानों की रेकी करने में सक्षम हैं। उन्होंने संकेत दिया कि कुछ उड़ानें उन क्षेत्रों के नजदीक भी दर्ज की गईं, जहां पाकिस्तान की सामरिक संपत्तियां मौजूद हैं।

हालांकि, पाकिस्तान सरकार या सेना की ओर से इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। लेकिन बयान ने देश की सुरक्षा प्रणाली और खुफिया तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

तालिबान और पाकिस्तान के रिश्तों में बढ़ती खटास

अफगानिस्तान में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही पाकिस्तान और अफगान तालिबान के रिश्तों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। Tehrik-i-Taliban Pakistan (टीटीपी) की गतिविधियों में बढ़ोतरी ने पाकिस्तान की चिंता बढ़ा दी है। पाकिस्तान पहले भी आरोप लगा चुका है कि अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल उसके खिलाफ हमलों के लिए किया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ड्रोन तकनीक उग्रवादी संगठनों के हाथों में पहुंचती है तो यह पारंपरिक सुरक्षा तंत्र के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकती है। कम लागत और आसानी से उपलब्ध तकनीक ने गैर-राज्य तत्वों को भी आधुनिक युद्धक क्षमता दे दी है।

परमाणु सुरक्षा पर उठे सवाल

पाकिस्तान दुनिया के उन देशों में शामिल है जिनके पास परमाणु हथियार हैं। ऐसे में किसी भी प्रकार की ड्रोन घुसपैठ की खबर बेहद संवेदनशील मानी जाती है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय पहले भी पाकिस्तान के परमाणु शस्त्रागार की सुरक्षा को लेकर चिंता जता चुका है, हालांकि इस्लामाबाद हमेशा दावा करता रहा है कि उसकी परमाणु कमान और नियंत्रण प्रणाली पूरी तरह सुरक्षित और बहुस्तरीय सुरक्षा घेरे में है।

रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि ड्रोन के जरिए निगरानी या संभावित हमले की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हाल के वर्षों में दुनिया भर में ड्रोन हमलों की घटनाएं बढ़ी हैं, जिसने पारंपरिक एयर डिफेंस सिस्टम की सीमाओं को उजागर किया है।

सरकार की चुप्पी, विपक्ष हमलावर

इस दावे के बाद पाकिस्तान की राजनीतिक फिजा भी गरमा गई है। विपक्षी दलों ने सरकार से जवाब मांगा है कि यदि इस तरह की गतिविधियां हो रही हैं तो उन्हें रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। वहीं, सुरक्षा एजेंसियां आधिकारिक तौर पर चुप्पी साधे हुए हैं।

विशेषज्ञ मानते हैं कि जब तक इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं होती, तब तक इसे अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता। फिर भी, इस तरह के आरोपों ने पाकिस्तान की आंतरिक और सामरिक सुरक्षा को लेकर बहस तेज कर दी है।

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