US-Saudi Arabia Tension: ईरान मुद्दे पर बढ़ी अमेरिका-सऊदी अरब की तकरार, ट्रंप प्रशासन ने हथियार रोकने की दी चेतावनी

Washington: मध्य पूर्व की बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच अमेरिका और सऊदी अरब के रिश्तों में खटास की खबरें सामने आई हैं। अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान को लेकर दोनों देशों के बीच रणनीतिक मतभेद इतने बढ़ गए कि ट्रंप प्रशासन और रियाद के बीच गंभीर टकराव की स्थिति बन गई। बताया जा रहा है कि इस विवाद के चलते अमेरिका को अपने प्रस्तावित सुरक्षा मिशन में बदलाव करना पड़ा, जबकि सऊदी अरब को रक्षा उपकरणों की आपूर्ति रोकने जैसी चेतावनी भी दी गई।

ऑपरेशन प्रोजेक्ट फ्रीडम को लेकर क्यों बढ़ा विवाद?

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक गतिविधियों के लिए अपने महत्वाकांक्षी ऑपरेशन प्रोजेक्ट फ्रीडम की योजना बनाई थी। इस मिशन के लिए वाशिंगटन ने सऊदी अरब से अपने सैन्य ठिकानों और हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल की अनुमति मांगी थी, लेकिन रियाद ने इसके लिए सहमति नहीं दी। इसी फैसले के बाद दोनों देशों के बीच तनाव खुलकर सामने आया।

अमेरिका ने हथियारों की आपूर्ति रोकने की दी चेतावनी

अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से प्रकाशित रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सऊदी अरब के रुख से नाराज ट्रंप प्रशासन ने मिसाइल इंटरसेप्टर सिस्टम और ड्रोन जैसी रक्षा तकनीकों की आपूर्ति रोकने की चेतावनी दी। माना जा रहा है कि यह कदम सऊदी अरब पर रणनीतिक दबाव बनाने के उद्देश्य से उठाया गया था।

होर्मुज जलडमरूमध्य मिशन पर पड़ा असर

बताया जा रहा है कि दोनों देशों के बीच बढ़े मतभेदों का असर होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा से जुड़े अमेरिकी मिशन पर भी पड़ा। आवश्यक सहयोग नहीं मिलने के कारण अमेरिका को अपनी योजना में बदलाव करना पड़ा और मिशन को अपेक्षित रूप से आगे नहीं बढ़ाया जा सका।

सऊदी अरब में सैन्य मौजूदगी घटाने पर विचार

अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इस घटनाक्रम के बाद वाशिंगटन सऊदी अरब में अपनी सैन्य तैनाती की समीक्षा कर रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिका अब उन सहयोगी देशों पर अधिक ध्यान देने की रणनीति बना सकता है जिन्होंने हालिया क्षेत्रीय तनाव के दौरान उसका सक्रिय समर्थन किया।

ईरान को लेकर अलग-अलग रणनीति बनी विवाद की वजह

सूत्रों के अनुसार, सऊदी अरब शुरू से ही ईरान के खिलाफ किसी बड़े सैन्य या आक्रामक कदम को लेकर सतर्क रुख अपनाए हुए था। रियाद चाहता था कि तनाव को बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों के जरिए कम किया जाए। बताया जाता है कि सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने भी अमेरिकी नेतृत्व से इस विषय पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया था, ताकि क्षेत्र में तनाव और न बढ़े।

मध्य पूर्व की राजनीति पर पड़ सकता है असर

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और सऊदी अरब के बीच रणनीतिक मतभेद लंबे समय तक बने रहते हैं तो इसका असर केवल दोनों देशों के संबंधों तक सीमित नहीं रहेगा। ईरान, खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और मध्य पूर्व की व्यापक भू-राजनीतिक स्थिति पर भी इसके दूरगामी प्रभाव देखने को मिल सकते हैं। हालांकि, दोनों देशों की ओर से इस पूरे घटनाक्रम पर आधिकारिक स्तर पर विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।

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