पुतिन पर ‘एपिबैटिडीन जहर’ से नवलनी की हत्या का आरोप: यूरोप की लैब रिपोर्ट से सनसनी, दक्षिण अमेरिकी मेंढक से जुड़ा घातक टॉक्सिन बना विवाद की जड़

मॉस्को। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर उनके कट्टर विरोधी एलेक्सी नवलनी को ‘एपिबैटिडीन’ नामक घातक जहर देकर मरवाने का गंभीर आरोप लगा है। यूरोप के पांच देशों—ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, स्वीडन और नीदरलैंड—ने दावा किया है कि यूरोपीय प्रयोगशालाओं में नवलनी के शरीर के नमूनों की जांच के दौरान एपिबैटिडीन की मौजूदगी पाई गई। इन देशों का कहना है कि यह विष रूस में प्राकृतिक रूप से नहीं मिलता और इसे प्रयोगशाला में तैयार किया गया हो सकता है।

यूरोपीय देशों का आरोप: रूस के पास साधन, मकसद और मौका तीनों

पांचों देशों ने संयुक्त रूप से कहा कि रूस के पास इस तरह के जहर के इस्तेमाल के लिए साधन, मकसद और अवसर—तीनों मौजूद थे। उन्होंने केमिकल वेपन्स कन्वेंशन के संभावित उल्लंघन को लेकर औपचारिक शिकायत दर्ज कराने की भी बात कही है। यूरोपीय राजनयिक सूत्रों के मुताबिक, इस मामले ने रूस और पश्चिमी देशों के बीच तनाव को फिर से बढ़ा दिया है।

क्या है एपिबैटिडीन? दक्षिण अमेरिकी ‘डार्ट मेंढक’ से जुड़ा घातक न्यूरोटॉक्सिन

अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, एपिबैटिडीन एक शक्तिशाली न्यूरोटॉक्सिन है, जो मुख्य रूप से दक्षिण अमेरिका में पाए जाने वाले जहरीले डार्ट मेंढकों की त्वचा में मिलता है। यह जहर सीधे नर्वस सिस्टम पर हमला करता है। पहले शरीर में लकवे जैसे लक्षण उभरते हैं, फिर सांस लेने में गंभीर दिक्कत होती है और अंततः दर्दनाक मौत हो सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह मॉर्फीन से लगभग 200 गुना ज्यादा प्रभावशाली माना जाता है।

करीब दो इंच लंबे डार्ट मेंढकों के शरीर में इतना जहर होता है कि उससे कई वयस्कों की जान जा सकती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि भले ही यह विष प्राकृतिक रूप से मेंढकों में पाया जाता हो, लेकिन आधुनिक लैब में इसका सिंथेटिक निर्माण संभव है। यूरोपीय विशेषज्ञों को आशंका है कि नवलनी मामले में इसी तरह प्रयोगशाला में तैयार जहर का इस्तेमाल हुआ।

आर्कटिक जेल में हुई थी नवलनी की मौत

16 फरवरी 2024 को आर्कटिक क्षेत्र की एक हाई-सिक्योरिटी जेल में सजा काट रहे नवलनी की अचानक मौत हो गई थी। वे 19 साल की सजा भुगत रहे थे और लंबे समय से सरकारी भ्रष्टाचार व सत्ता विरोधी अभियानों के कारण चर्चा में थे। पश्चिमी देशों का आरोप है कि नवलनी को राजनीतिक खतरे के रूप में देखा जाता था।

ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेट कूपर ने कहा कि यह घटना दर्शाती है कि रूस अपने विरोधियों से किस हद तक डरता है। फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरो ने इसे सत्ता बचाने के लिए खतरनाक हथियारों तक के इस्तेमाल की मिसाल बताया। वहीं नवलनी की पत्नी यूलिया नवलनाया ने शुरू से जहर दिए जाने की आशंका जताई थी और अब रिपोर्ट सामने आने के बाद उन्होंने पुतिन को जिम्मेदार ठहराने की मांग की है।

हालांकि रूसी अधिकारियों ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि नवलनी की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई और पश्चिमी देशों के आरोप राजनीति से प्रेरित हैं।

2020 में भी ‘नोविचोक’ से जहर देने का आरोप

यह पहला मौका नहीं है जब नवलनी को जहर देने की बात सामने आई हो। साल 2020 में उन पर ‘नोविचोक’ नामक नर्व एजेंट से हमला हुआ था। इलाज के लिए उन्हें जर्मनी ले जाया गया, जहां वे स्वस्थ हुए। रूस लौटते ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और तब से वे जेल में थे। क्रेमलिन ने उस समय भी किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया था।

रूस पर पहले भी लगे हैं जहर हमलों के आरोप

रूस पर पूर्व में भी कथित जहर हमलों को लेकर आरोप लगते रहे हैं। 2018 में इंग्लैंड के सैलिस्बरी शहर में पूर्व रूसी एजेंट सर्गेई स्क्रिपल और उनकी बेटी पर नर्व एजेंट से हमला हुआ था। 2006 में लंदन में पूर्व एजेंट अलेक्जेंडर लिट्विनेंको की रेडियोएक्टिव पदार्थ से मौत ने भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सनसनी फैलाई थी। हालांकि रूस ने हर मामले में अपनी भूमिका से इनकार किया है।

26 साल से सत्ता के केंद्र में पुतिन

रूस की राजनीति में पुतिन दो दशक से अधिक समय से केंद्रीय भूमिका में हैं। वे पहली बार साल 2000 में राष्ट्रपति बने। इससे पहले 1999 में तत्कालीन राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन ने उन्हें प्रधानमंत्री नियुक्त किया था। 2000 से 2008 तक लगातार दो कार्यकाल के बाद संवैधानिक प्रावधानों के चलते वे सीधे तीसरी बार राष्ट्रपति नहीं बन सके। इसके बाद उनके करीबी सहयोगी दिमित्री मेदवेदेव राष्ट्रपति बने और पुतिन प्रधानमंत्री की भूमिका में रहे। 2012 में वे फिर से राष्ट्रपति बने और तब से सत्ता में हैं।

नवलनी की मौत और एपिबैटिडीन जहर के आरोपों ने रूस की राजनीति को एक बार फिर वैश्विक बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है। अब निगाहें अंतरराष्ट्रीय जांच, कूटनीतिक कदमों और रूस की आधिकारिक प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।

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