ढाका। दक्षिण एशिया की राजनीति में तेजी से बदलते समीकरणों के बीच बांग्लादेश अब चीन के साथ अपने रिश्तों को नई ऊंचाई देने की तैयारी में दिखाई दे रहा है। पड़ोसी देश की मौजूदा रणनीति को लेकर क्षेत्रीय स्तर पर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। माना जा रहा है कि बांग्लादेश आर्थिक सहयोग, निवेश और विकास परियोजनाओं के लिए चीन की ओर बड़े स्तर पर रुख कर सकता है।
चीन से बड़े आर्थिक पैकेज की उम्मीद
सूत्रों के मुताबिक, बांग्लादेश सरकार चीन से वित्तीय सहायता, निवेश और आधारभूत ढांचा परियोजनाओं के लिए सहयोग बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है। इस दिशा में कई प्रस्ताव तैयार किए जा चुके हैं। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान की प्रस्तावित चीन यात्रा के दौरान इन योजनाओं को लेकर महत्वपूर्ण समझौते हो सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि बांग्लादेश अपनी आर्थिक जरूरतों को पूरा करने और विकास परियोजनाओं को गति देने के लिए विदेशी निवेश को प्राथमिकता दे रहा है। इसी कारण चीन के साथ सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
पाकिस्तान मॉडल से हो रही तुलना
बांग्लादेश के इस कदम की तुलना पाकिस्तान की नीतियों से की जा रही है। पाकिस्तान पिछले कई वर्षों से चीन के साथ बड़े आर्थिक और रणनीतिक सहयोग कार्यक्रमों पर काम करता रहा है। अब बांग्लादेश के बढ़ते चीन झुकाव को भी उसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि चीन और बांग्लादेश के बीच बड़े निवेश समझौते होते हैं तो इसका असर पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र की भू-राजनीति पर पड़ सकता है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इन संभावित समझौतों पर नजर रखी जा रही है।
तारिक रहमान की चीन यात्रा पर सबकी नजर
आने वाले दिनों में प्रधानमंत्री तारिक रहमान की चीन यात्रा को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि इस दौरे के दौरान आर्थिक सहयोग, निवेश, व्यापार और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कई अहम समझौतों पर चर्चा होगी। यदि ये समझौते अंतिम रूप लेते हैं तो बांग्लादेश की आर्थिक दिशा और विदेश नीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
दक्षिण एशिया में बदल सकते हैं शक्ति संतुलन के समीकरण
चीन के साथ बढ़ती नजदीकियां केवल आर्थिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि रणनीतिक स्तर पर भी महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बांग्लादेश का यह रुख दक्षिण एशिया में नए राजनीतिक और आर्थिक समीकरणों को जन्म दे सकता है। ऐसे में क्षेत्रीय देशों की निगाहें अब ढाका और बीजिंग के बीच होने वाली संभावित वार्ताओं पर टिकी हुई हैं।
Hindustan Awaaz – Hindustan Newspaper, ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, देश-दुनिया
