
नई दिल्ली। एक महिला के लिए मां बनना दुनिया का सबसे सुखद अहसास होता है, लेकिन इस प्रक्रिया के बाद शरीर कई तरह के बदलावों से गुजरता है। अक्सर नई माताएं इस बात से परेशान रहती हैं कि डिलीवरी के कुछ महीनों बाद उनके बाल अचानक बहुत तेजी से झड़ने लगे हैं। इसे मेडिकल भाषा में ‘पोस्टपार्टम एलोपेसिया’ (Postpartum Alopecia) कहा जाता है। आज हम जानेंगे कि आखिर प्रसव के बाद ऐसा क्यों होता है और आप घर पर ही इसे कैसे नियंत्रित कर सकती हैं।
आखिर क्यों टूटने लगते हैं बाल? समझें मुख्य कारण
डिलीवरी के बाद बालों का झड़ना कोई बीमारी नहीं, बल्कि शरीर की एक प्राकृतिक प्रतिक्रिया है। इसके मुख्य तीन कारण हैं:
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हॉर्मोन का गिरता स्तर: गर्भावस्था के दौरान शरीर में ‘एस्ट्रोजन’ (Estrogen) हॉर्मोन का लेवल बहुत हाई होता है, जिससे बाल घने और चमकदार दिखते हैं। लेकिन डिलीवरी के तुरंत बाद यह लेवल तेजी से गिरता है, जिससे बाल अपनी ‘रेस्टिंग फेज’ में चले जाते हैं और झड़ने लगते हैं।
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पोषक तत्वों की भारी कमी: बच्चे के जन्म के बाद मां के शरीर में आयरन, कैल्शियम और विटामिन्स की कमी हो जाती है। यदि डाइट पर ध्यान न दिया जाए, तो बालों की जड़ों को पर्याप्त पोषण नहीं मिलता।
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नींद की कमी और तनाव: नवजात शिशु की देखभाल के कारण मां की नींद पूरी नहीं हो पाती। मानसिक तनाव और शारीरिक थकान सीधे तौर पर हेयर फॉल को बढ़ावा देते हैं।
बालों को झड़ने से रोकने के असरदार उपाय
अच्छी खबर यह है कि यह समस्या अस्थायी है। आप अपनी जीवनशैली में कुछ बदलाव करके इसे रोक सकती हैं:
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सुपरफूड्स को डाइट में करें शामिल: अपने भोजन में आयरन, कैल्शियम और विटामिन-C की मात्रा बढ़ाएं। पालक, चुकंदर, अनार, दालें, अंडा और पनीर जैसे प्रोटीन युक्त आहार बालों की जड़ों को मजबूती देते हैं।
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तेल मालिश और कोमल देखभाल: हफ्ते में कम से कम एक बार गुनगुने प्राकृतिक तेल (जैसे नारियल या बादाम तेल) से सिर की हल्की मालिश करें। इससे स्कैल्प में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है। गीले बालों में कंघी करने से बचें।
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तनाव प्रबंधन और भरपूर नींद: माना कि शिशु के साथ नींद पूरी करना कठिन है, लेकिन जब बच्चा सोए, तब आप भी आराम करने की कोशिश करें। तनाव कम करने के लिए हल्का ध्यान या प्राणायाम करें।
कब लें डॉक्टर की सलाह?
आमतौर पर प्रसव के 6 से 12 महीने के भीतर बाल वापस आने लगते हैं। लेकिन अगर एक साल बाद भी बाल झड़ना बंद न हों या सिर पर पैच दिखने लगें, तो यह किसी अन्य मेडिकल समस्या या गंभीर एनीमिया का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में डर्मेटोलॉजिस्ट या अपनी गायनेकोलॉजिस्ट से परामर्श जरूर लें।
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