मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच पीएम मोदी का बड़ा कूटनीतिक कदम: ओमान, कुवैत, कतर समेत कई खाड़ी देशों के नेताओं से की अहम बातचीत

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध जैसे हालात के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को खाड़ी क्षेत्र के कई शीर्ष नेताओं से फोन पर बातचीत कर हालात का जायजा लिया। ईरान से जुड़े बढ़ते सैन्य तनाव और क्षेत्र में हुए हालिया हमलों को लेकर प्रधानमंत्री ने गहरी चिंता जताई। इस दौरान उन्होंने संबंधित देशों में रह रहे भारतीय समुदाय की सुरक्षा और कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया।

खाड़ी देशों के शीर्ष नेतृत्व से सीधे संवाद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हैथम बिन तारिक, शेख सबाह अल-खालिद अल-हमद अल-मुबारक अल-सबाह और शेख तमीम बिन हमद अल थानी से टेलीफोन पर विस्तार से चर्चा की। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, यह बातचीत मंगलवार दोपहर बाद हुई, जिसमें क्षेत्रीय सुरक्षा हालात और हालिया हमलों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने संबंधित देशों में हुए हमलों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि मौजूदा परिस्थिति गंभीर है और शांति बहाली के प्रयासों की आवश्यकता है। उन्होंने विशेष रूप से वहां रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

भारतीय समुदाय की सुरक्षा पर विशेष फोकस

टेलीफोन वार्ता के दौरान प्रधानमंत्री ने खाड़ी देशों में रह रहे लाखों भारतीयों की सुरक्षा और भलाई को लेकर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर सजग है और स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है। भारतीय दूतावासों और मिशनों को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में भारतीय कामगार, पेशेवर और कारोबारी समुदाय निवास करता है। ऐसे में क्षेत्रीय तनाव का असर सीधे तौर पर भारतीयों पर पड़ सकता है, जिसे लेकर केंद्र सरकार सक्रिय कूटनीतिक संपर्क बनाए हुए है।

अमेरिका-इजराइल की कार्रवाई के बाद तेज हुई हलचल

सूत्रों के मुताबिक, यह उच्चस्तरीय संपर्क अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान के खिलाफ संयुक्त सैन्य कार्रवाई शुरू किए जाने के बाद हुआ। इस घटनाक्रम के बाद पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता का माहौल बना हुआ है और कई देशों में सुरक्षा सतर्कता बढ़ा दी गई है।

प्रधानमंत्री ने इससे पहले भी क्षेत्र के अन्य अहम नेताओं से संपर्क साधा था। उन्होंने हामद बिन ईसा अल खलीफा और मोहम्मद बिन सलमान से बातचीत कर हालिया हमलों की निंदा की और कहा कि भारत इस कठिन समय में उनके साथ एकजुटता से खड़ा है।

जॉर्डन और यूएई के नेतृत्व से भी संवाद

क्षेत्रीय स्थिति पर व्यापक दृष्टिकोण अपनाते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने अब्दुल्ला द्वितीय से भी बातचीत की और बिगड़ते हालात पर चिंता जताई। इसके अलावा उन्होंने मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान तथा बेंजामिन नेतन्याहू से भी फोन पर चर्चा की।

इन सभी वार्ताओं में क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और कूटनीतिक समाधान पर जोर दिया गया। भारत ने साफ किया कि वह पश्चिम एशिया में शांति और संवाद के पक्ष में है तथा किसी भी प्रकार की हिंसा से क्षेत्रीय संतुलन बिगड़ने को लेकर चिंतित है।

भारत की सक्रिय कूटनीति पर दुनिया की नजर

विशेषज्ञों का मानना है कि खाड़ी और पश्चिम एशिया के देशों से लगातार संपर्क भारत की सक्रिय और संतुलित विदेश नीति का संकेत है। भारत न केवल अपने सामरिक और आर्थिक हितों की रक्षा कर रहा है, बल्कि क्षेत्रीय शांति के लिए भी सकारात्मक भूमिका निभा रहा है।

पश्चिम एशिया में मौजूदा हालात को देखते हुए आने वाले दिनों में भारत की कूटनीतिक सक्रियता और बढ़ सकती है। सरकार की प्राथमिकता साफ है—भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति की स्थिरता और क्षेत्र में शांति।

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