PM Modi Israel Visit 2026: फिलिस्तीन को छोड़ इजरायल रवाना होंगे पीएम मोदी, कांग्रेस ने उठाए तीखे सवाल

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 फरवरी 2026 को एक दिवसीय दौरे पर इजरायल पहुंचने वाले हैं। यह उनकी दूसरी इजरायल यात्रा होगी, जो लगभग नौ वर्षों बाद हो रही है। हालांकि इस दौरे से पहले ही देश की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस ने पीएम मोदी की इस यात्रा पर कड़ा ऐतराज जताते हुए आरोप लगाया है कि मोदी सरकार ने फिलिस्तीन के मुद्दे को नजरअंदाज कर दिया है, जबकि भारत ऐतिहासिक रूप से फिलिस्तीन को मान्यता देने वाले शुरुआती देशों में रहा है।

कांग्रेस का हमला: ‘फिलिस्तीनियों को छोड़ दिया’

कांग्रेस सांसद और पार्टी के कम्युनिकेशन प्रभारी जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लंबी पोस्ट साझा करते हुए सरकार की विदेश नीति पर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि वेस्ट बैंक के कब्जे वाले इलाकों में फिलिस्तीनियों को बेदखल और विस्थापित करने की घटनाएं बढ़ रही हैं और गाजा में लगातार सैन्य कार्रवाई हो रही है, जिसकी वैश्विक स्तर पर आलोचना की जा रही है।

कांग्रेस का कहना है कि ऐसे समय में जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय में इजरायल की कार्रवाई को लेकर बहस तेज है, तब प्रधानमंत्री का इजरायल दौरा कई सवाल खड़े करता है। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ संभावित रणनीतियों की चर्चा के बीच यह यात्रा संवेदनशील मानी जा रही है।

नौ साल बाद इजरायल दौरा, कूटनीतिक नजरिए से अहम

प्रधानमंत्री Narendra Modi की यह दूसरी इजरायल यात्रा है। इससे पहले उन्होंने 2017 में ऐतिहासिक दौरा किया था, जिसे भारत-इजरायल संबंधों में मील का पत्थर माना गया था। इस बार का दौरा रणनीतिक, रक्षा और तकनीकी सहयोग के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

भारत और इजरायल के बीच रक्षा, कृषि, जल प्रबंधन और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग लगातार मजबूत हुआ है। ऐसे में यह यात्रा दोनों देशों के द्विपक्षीय रिश्तों को नई दिशा दे सकती है।

नेतन्याहू से मुलाकात पर भी सियासी तंज

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने अपने बयान में इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पीएम मोदी अपने ‘करीबी मित्र’ नेतन्याहू से मुलाकात करेंगे, जो अपने देश में भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे हैं।

कांग्रेस ने यह भी दावा किया है कि प्रधानमंत्री मोदी के इजरायली संसद को संभावित संबोधन को लेकर वहां के विपक्षी दलों ने बहिष्कार की चेतावनी दी है। हालांकि इस पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

विदेश नीति पर सियासी संग्राम

कांग्रेस का आरोप है कि भारत की पारंपरिक संतुलित विदेश नीति, जिसमें इजरायल और फिलिस्तीन दोनों के साथ संबंध बनाए रखने की रणनीति रही है, उससे मौजूदा सरकार हटती नजर आ रही है। वहीं सरकार समर्थकों का तर्क है कि भारत अपनी राष्ट्रीय हितों के आधार पर स्वतंत्र विदेश नीति चलाता है और सभी देशों से संबंध मजबूत करना उसकी प्राथमिकता है।

अब देखना होगा कि प्रधानमंत्री मोदी की यह इजरायल यात्रा कूटनीतिक रूप से क्या संदेश देती है और क्या इससे भारत-फिलिस्तीन समीकरण पर कोई असर पड़ता है या नहीं। फिलहाल, इस दौरे को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो चुकी है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमा सकता है।

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