जंग के साये में बड़ा फैसला: हिज्बुल्लाह के हमलों के बीच भारत से 250 लोगों को इजरायल ने बसाया, क्या है पूरी रणनीति?

मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच इजरायल का अनोखा कदम, भारत से समुदाय को सीधे संवेदनशील इलाकों में बसाने की योजना चर्चा में

मध्य-पूर्व में जारी तनाव और हिज्बुल्लाह की ओर से लगातार हो रही फायरिंग के बीच इजरायल ने एक ऐसा कदम उठाया है, जिसने वैश्विक स्तर पर ध्यान खींचा है। गुरुवार को भारत से करीब 250 लोगों को विशेष अभियान के तहत इजरायल पहुंचाया गया। ये सभी लोग उत्तर-पूर्व भारत के एक विशेष समुदाय से जुड़े बताए जा रहे हैं, जिन्हें लंबे समय से इजरायल अपने ऐतिहासिक और धार्मिक संबंधों के आधार पर बसाने की प्रक्रिया में लगा हुआ है।

जंग के बीच बसावट का फैसला क्यों?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब उत्तरी इजरायल में हिज्बुल्लाह के साथ तनाव चरम पर है और सीमा क्षेत्रों में लगातार हमले हो रहे हैं, ऐसे समय में नए लोगों को वहां क्यों बसाया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम सिर्फ मानवीय या धार्मिक नहीं, बल्कि रणनीतिक भी हो सकता है।

इजरायल लंबे समय से ‘लॉ ऑफ रिटर्न’ के तहत दुनिया भर के यहूदी समुदायों को अपने देश में बसाने की नीति पर काम करता रहा है। इसी कड़ी में भारत के उत्तर-पूर्व में रहने वाले इस समुदाय को भी यहूदी मूल का माना जाता है।

भारत से एयरलिफ्ट ऑपरेशन

गुरुवार को एक विशेष उड़ान के जरिए 250 लोगों को भारत से इजरायल ले जाया गया। इस ऑपरेशन को काफी गोपनीय तरीके से अंजाम दिया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, आने वाले दिनों में और लोगों को भी इसी तरह स्थानांतरित किया जा सकता है।

इन लोगों को इजरायल के उत्तरी हिस्सों में बसाने की योजना है, जहां सुरक्षा हालात फिलहाल चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं।

कौन है यह समुदाय?

भारत के मिजोरम और मणिपुर जैसे राज्यों में रहने वाला यह समुदाय खुद को प्राचीन इस्राइली जनजातियों का वंशज मानता है। पिछले कई दशकों से ये लोग इजरायल जाने की इच्छा रखते रहे हैं और धीरे-धीरे इन्हें वहां बसाया भी जा रहा है।

इजरायल सरकार और कुछ धार्मिक संगठनों के सहयोग से अब तक हजारों लोगों को वहां बसाया जा चुका है।

रणनीति या आस्था?

विश्लेषकों के अनुसार, इस कदम के पीछे दो बड़े कारण हो सकते हैं। पहला, इजरायल अपनी जनसंख्या को बढ़ाना चाहता है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां सुरक्षा खतरे अधिक हैं। दूसरा, यह धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने की नीति का हिस्सा भी हो सकता है।

हालांकि, युद्ध जैसे हालात में इस तरह के फैसले को लेकर आलोचना भी हो रही है। कुछ विशेषज्ञ इसे जोखिम भरा मानते हैं, क्योंकि नए लोगों को सीधे संघर्ष वाले इलाकों में बसाना उनकी सुरक्षा के लिहाज से चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

आगे क्या?

संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले महीनों में इस तरह के और भी ऑपरेशन हो सकते हैं। इजरायल अपने वैश्विक यहूदी समुदाय को जोड़ने की नीति पर तेजी से काम कर रहा है, भले ही हालात कितने ही जटिल क्यों न हों|

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