लखनऊ: उत्तर प्रदेश की प्रतिष्ठित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) से एक शर्मनाक मामला सामने आया है। संस्थान के बाल रोग विभाग (Pediatrics Department) के एक एडिशनल प्रोफेसर पर जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर ने अश्लील मैसेज भेजने और मानसिक उत्पीड़न करने का गंभीर आरोप लगाया है। इस मामले में एक्शन लेते हुए KGMU प्रशासन ने आरोपी प्रोफेसर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
परेशान होकर डॉक्टर ने परिवार संग बुलाई गुहार
यह मामला तब तूल पकड़ा जब पीड़ित जूनियर डॉक्टर ने अपने परिजनों के साथ संस्थान के प्रशासन से मिलकर आपबीती सुनाई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि एडिशनल प्रोफेसर काफी समय से मोबाइल पर अभद्र और अश्लील मैसेज भेजकर उसे परेशान कर रहे थे। डॉक्टर के कार्यक्षेत्र में भी उनके साथ दुर्व्यवहार किया जा रहा था। मामला संवेदनशील देखते हुए कुलपति प्रोफेसर सोनिया नित्यानंद ने तुरंत सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए।
7 सदस्यीय विशाखा समिति की जांच में फंसे प्रोफेसर
शिकायत मिलने के 24 घंटे के भीतर यानी 11 फरवरी को केजीएमयू प्रशासन ने 7 सदस्यीय विशाखा समिति (Internal Complaints Committee) का गठन किया। समिति ने पीड़िता का बयान दर्ज करने के साथ ही आरोपी प्रोफेसर को तलब कर पूछताछ की। सूत्रों के मुताबिक, प्रारंभिक जांच में मोबाइल मैसेज और पीड़िता के बयानों के आधार पर आरोपों में सत्यता पाई गई।
निलंबन की कार्रवाई और कड़ा संदेश
विशाखा समिति की प्रारंभिक रिपोर्ट बुधवार को पेश की गई, जिसके आधार पर आरोपी एडिशनल प्रोफेसर को निलंबित कर दिया गया। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें चिकित्सा विभाग के डीन कार्यालय से अटैच किया गया है। KGMU के प्रवक्ता प्रोफेसर केके सिंह ने स्पष्ट किया कि, “संस्थान में इस तरह का व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जांच रिपोर्ट के आधार पर आरोपी प्रोफेसर को सस्पेंड कर दिया गया है और आगे की विस्तृत जांच जारी है।”
दोषियों को नहीं बख्शा जाएगा: प्रशासन
प्रशासन का कहना है कि वे पूरे मामले की तह तक जा रहे हैं ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर लगाम लगाई जा सके। महिला डॉक्टरों और कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए संस्थान पूरी तरह प्रतिबद्ध है। फिलहाल, इस कार्रवाई के बाद से केजीएमयू के डॉक्टरों और स्टाफ के बीच भारी हलचल देखी जा रही है।
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