
मॉस्को/इस्लामाबाद/काबुल। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव अब खुली जंग में बदलता दिख रहा है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री Khawaja Asif ने अफगानिस्तान के खिलाफ कार्रवाई का ऐलान करते हुए साफ कहा है कि “अब यह हमारे और तुम्हारे बीच खुली जंग है।” पाकिस्तान की ओर से 22 फरवरी को अफगानिस्तान में एयरस्ट्राइक किए जाने के बाद तालिबान ने जवाबी हमला किया, जिसके बाद काबुल और कांधार में फिर से पाकिस्तानी हवाई हमलों की खबरें सामने आई हैं। दोनों देशों ने हवाई और जमीनी हमलों की पुष्टि की है, जबकि हताहतों को लेकर दावे और प्रतिदावे जारी हैं।
एयरस्ट्राइक के बाद जमीनी झड़पें तेज
पाकिस्तान की ओर से किए गए हमलों के बाद तालिबान ने सीमावर्ती इलाकों में जवाबी कार्रवाई का दावा किया। अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक उसकी सेना ने एक दर्जन से अधिक पाकिस्तानी चौकियों पर कब्जा कर लिया और 19 चेक पोस्ट तथा दो सैन्य ठिकानों को तबाह कर दिया। तालिबान ने 55 पाकिस्तानी सैनिकों के मारे जाने का दावा किया है और कहा है कि लड़ाई आधी रात के बाद थमी। हालांकि पाकिस्तान ने इन दावों को खारिज कर दिया है।
पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार के अनुसार, दो पाकिस्तानी सैनिक मारे गए और तीन घायल हुए, जबकि 36 अफगान लड़ाके ढेर किए गए। दूसरी ओर, अफगान पक्ष का कहना है कि कई पाकिस्तानी सैनिक पकड़े भी गए हैं। तालिबान ने अपने आठ सैनिकों के मारे जाने और 11 के घायल होने की बात स्वीकारी है। जमीनी हालात को लेकर स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल संभव नहीं है।
‘भारत का मोहरा’ वाला बयान और बढ़ा तनाव
रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर तालिबान को भारत का मोहरा बताया। उनके इस बयान ने पहले से सुलग रहे विवाद को और भड़का दिया है। इस पूरे घटनाक्रम में क्षेत्रीय शक्ति संतुलन और कूटनीतिक समीकरणों पर भी सवाल उठने लगे हैं। भारत पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि वह किसी भी प्रकार के संघर्ष का समर्थन नहीं करता और क्षेत्रीय शांति का पक्षधर है।
‘ब्रिक्स को कमजोर करने की साजिश’?
रूस से आई प्रतिक्रिया ने इस युद्ध को वैश्विक भू-राजनीति से जोड़ दिया है। रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin के करीबी माने जाने वाले दार्शनिक अलेक्जेंडर डुगिन ने अफगान-पाकिस्तान संघर्ष को BRICS के खिलाफ रणनीतिक चाल बताया है। उनका आरोप है कि यह टकराव अमेरिकी हितों से जुड़ा है और इसका उद्देश्य BRICS जैसे उभरते बहुध्रुवीय मंच को कमजोर करना हो सकता है।
डुगिन के अनुसार, अफगानिस्तान के पीछे भारत और पाकिस्तान के पीछे चीन खड़ा है। ऐसे में यदि दक्षिण एशिया में युद्ध भड़कता है तो BRICS के दो प्रमुख सदस्य—भारत और चीन—अप्रत्यक्ष रूप से टकराव की स्थिति में आ सकते हैं। उनका इशारा अमेरिका की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति की ओर भी रहा, जिसे उन्होंने वैश्विक शक्ति संतुलन बदलने की रणनीति बताया।
जियो-पॉलिटिक्स की नई बिसात?
विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है तो इसका असर दक्षिण एशिया की सुरक्षा, व्यापार मार्गों और क्षेत्रीय संगठनों पर पड़ सकता है। BRICS, शंघाई सहयोग संगठन और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी परियोजनाएं भी प्रभावित हो सकती हैं। हालांकि भारत ने बार-बार दोहराया है कि वह किसी भी सैन्य टकराव में पक्षकार नहीं है और संवाद के जरिए समाधान का समर्थक है।
क्या आगे और भड़केगा संघर्ष?
सीमा पर लगातार गोलाबारी और एयरस्ट्राइक के दावों ने हालात को गंभीर बना दिया है। दोनों देशों की ओर से सख्त बयानबाजी जारी है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कूटनीतिक प्रयास तुरंत शुरू नहीं हुए तो यह टकराव व्यापक क्षेत्रीय संकट का रूप ले सकता है। फिलहाल दुनिया की नजर काबुल, कांधार और इस्लामाबाद पर टिकी है कि अगला कदम क्या होगा।
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