
नई दिल्ली। लोकसभा में शुक्रवार को एक बार फिर सियासी गर्मी देखने को मिली, जब सांसद गौरव गोगोई ने अध्यक्ष ओम बिरला पर पक्षपात का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सदन में लोकतंत्र और मर्यादा बनाए रखने के लिए एक संकल्प लाना जरूरी हो गया है। गौरव गोगोई की यह अपील सदस्यों के बीच जोरदार चर्चा का कारण बनी।
Subheading: सदन में उठे सवाल, लोकतांत्रिक मर्यादा पर बहस
लोकसभा में बोलते हुए गौरव गोगोई ने कहा कि सदन की गरिमा और मर्यादा बनाए रखना हर सांसद की जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि अध्यक्ष की भूमिका निष्पक्ष नहीं रही, तो यह लोकतंत्र की आत्मा के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। उनके इस बयान के बाद सदन में कुछ मिनटों के लिए हंगामा भी हुआ।
Subheading: संकल्प लाकर सदन में शांति बनाए रखने का प्रयास
गौरव गोगोई ने सदन में यह भी प्रस्तावित किया कि एक विशेष संकल्प के जरिए सदन की मर्यादा और लोकतांत्रिक आदर्शों की रक्षा की जाए। उन्होंने कहा कि सभी सांसदों को इस मुद्दे पर एकजुट होकर काम करना चाहिए, ताकि भविष्य में किसी भी तरह के पक्षपात या अनुचित व्यवहार की संभावना कम हो।
इस अवसर पर विपक्ष ने भी अपनी नाराजगी जताई और कहा कि अध्यक्ष को अपने कर्तव्यों में निष्पक्ष रहना चाहिए। जबकि सत्ता पक्ष ने इस आरोप को खारिज किया और कहा कि अध्यक्ष सदन के नियमों और परंपराओं के अनुसार कार्य कर रहे हैं।
Subheading: सियासी मंच पर विपक्ष और सत्ता पक्ष की टकराहट
संसद में इस मुद्दे को लेकर विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच बहस तेज हो गई। गौरव गोगोई ने जोर देकर कहा कि सदन में लोकतंत्र की मर्यादा बनाए रखना सभी सांसदों का कर्तव्य है और इसके लिए संकल्प आवश्यक है। इस घटना ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि संसद में राजनीतिक हलचल हमेशा जीवंत रहती है।
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