खुली सीमा, कड़ी सुरक्षा: भारत-नेपाल के बीच ऐतिहासिक ‘MLA’ समझौता तैयार, क्या चुनाव से पहले होगा हस्ताक्षर?

काठमांडू: भारत और नेपाल के बीच रिश्तों की डोर और मजबूत होने जा रही है। दोनों देश एक ऐसे महत्वपूर्ण कानूनी समझौते की दहलीज पर खड़े हैं, जो अपराधियों और आतंकियों के लिए ‘सेफ हेवन’ माने जाने वाले रास्तों को हमेशा के लिए बंद कर देगा। म्युचुअल लीगल असिस्टेंस (MLA) नामक यह समझौता पूरी तरह तैयार है और अब बस इस पर आधिकारिक मोहर लगने का इंतजार है। चर्चा है कि नेपाल में मार्च 2026 में होने वाले चुनावों से पहले इस पर हस्ताक्षर किए जा सकते हैं।

क्या है ‘MLA’ समझौता और क्यों है इसकी जरूरत?

भारत और नेपाल के बीच 1,751 किलोमीटर लंबी खुली सीमा है, जिसका फायदा उठाकर अपराधी अक्सर एक देश में गुनाह कर दूसरे देश में शरण ले लेते हैं। वर्तमान में दोनों देशों के बीच कोई प्रभावी प्रत्यर्पण संधि (Extradition Treaty) नहीं है (1953 की संधि पुरानी पड़ चुकी है), जिससे अपराधियों को सौंपने में कानूनी अड़चनें आती हैं।

जुलाई 2025 में बनी थी सहमति, अब अंतिम चरण में प्रक्रिया

इस समझौते की नींव पिछले साल जुलाई में नई दिल्ली में हुई गृह सचिव स्तर की बैठक में रखी गई थी। कई वर्षों की पेचीदा बातचीत के बाद दोनों पक्ष इस मसौदे पर सहमत हुए हैं। नेपाली मीडिया के अनुसार, भारत ने अपनी आंतरिक औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं। नेपाल के प्रधानमंत्री कार्यालय और विदेश मंत्रालय अब एक ‘अनुकूल तारीख’ की तलाश में हैं। यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो नेपाल के कानून मंत्री अनिल सिन्हा चुनाव से पहले इस पर हस्ताक्षर कर सकते हैं।

अपराधियों की खैर नहीं: संपत्तियां होंगी जब्त

इस समझौते के लागू होते ही भारत और नेपाल की जांच एजेंसियां एक-दूसरे के देश में छिपे संदिग्धों का न केवल पता लगा सकेंगी, बल्कि उनकी अपराध से अर्जित संपत्तियों को जब्त भी कर सकेंगी। यह खासकर वित्तीय धोखाधड़ी कर भागने वालों और आतंकी मॉड्यूल के खिलाफ एक अचूक हथियार साबित होगा।

चुनाव का पेंच: मार्च से पहले या बाद में?

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह समझौता मार्च में होने वाले नेपाल चुनाव से पहले होगा। फरवरी के पहले हफ्ते में होने वाली विदेश मंत्री बालनंद शर्मा की भारत यात्रा स्थगित होने के बाद अब इसे जल्द निपटाने की कोशिशें तेज हैं। सूत्रों का कहना है कि सुरक्षा एजेंसियां चाहती हैं कि इसे जल्द से जल्द लागू किया जाए ताकि चुनाव के दौरान सीमा पार से होने वाली संदिग्ध गतिविधियों पर नकेल कसी जा सके।

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