North Korea Nuclear Weapons News: उत्तर कोरिया ने एक बार फिर अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर सख्त रुख दिखाया है। देश के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन की बहन और सत्ता में प्रभावशाली नेता किम यो जोंग ने अमेरिका को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा है कि उत्तर कोरिया अपनी परमाणु शक्ति की स्थिति पर किसी भी तरह की बातचीत या समझौता नहीं करेगा। उन्होंने अमेरिकी प्रयासों को अवास्तविक बताते हुए कहा कि वॉशिंगटन अब भी पुराने सपनों में जी रहा है।
परमाणु कार्यक्रम पर पीछे हटने का सवाल ही नहीं
उत्तर कोरिया की वरिष्ठ अधिकारी किम यो जोंग ने कहा कि उनका देश एक परमाणु हथियार संपन्न राष्ट्र है और इस वास्तविकता को नजरअंदाज करने वाले अमेरिकी दावों की कोई कानूनी या राजनीतिक अहमियत नहीं है। उन्होंने दो टूक कहा कि उत्तर कोरिया अपनी सुरक्षा और रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की नीति से पीछे नहीं हटेगा।
किम यो जोंग के अनुसार, अमेरिका और उसके सहयोगी देशों द्वारा लगातार बढ़ाए जा रहे सैन्य दबाव के बीच उत्तर कोरिया अपने रक्षा कार्यक्रम को और मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि देश के रणनीतिक हथियारों के विकास का फैसला स्थायी और अपरिवर्तनीय है।
‘अमेरिका अभी भी पुराने सपने देख रहा है’
किम यो जोंग ने अमेरिका की उस नीति को खारिज कर दिया जिसमें उत्तर कोरिया को परमाणु-मुक्त बनाने की बात की जाती है। उन्होंने कहा कि यह सोच वास्तविकता से दूर और बीते दौर की मानसिकता का प्रतीक है।
उन्होंने बयान में कहा कि कुछ अमेरिकी अधिकारी अब भी पुराने विचारों और भ्रमों से बाहर नहीं निकल पाए हैं। ऐसे हालात में उत्तर कोरिया अपने हथियार कार्यक्रम को बिना किसी शर्त के आगे बढ़ाता रहेगा।
ट्रंप और शी जिनपिंग से जुड़े दावों पर भी उठाए सवाल
उत्तर कोरियाई नेता की बहन ने अमेरिका के उस दावे को भी खारिज किया, जिसमें कहा गया था कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने हालिया बातचीत के दौरान उत्तर कोरिया के परमाणु निरस्त्रीकरण को साझा लक्ष्य बताया था।
किम यो जोंग ने इस दावे को भ्रामक और तथ्यों से परे बताया। उन्होंने कहा कि कोई भी देश अमेरिका की एकतरफा घोषणाओं को स्वीकार करने के लिए बाध्य नहीं है।
संविधान में दर्ज है परमाणु शक्ति का दर्जा
गौरतलब है कि उत्तर कोरिया ने वर्ष 2023 में अपने संविधान में परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र की स्थिति को औपचारिक रूप से शामिल किया था। इसके बाद से देश लगातार अपने परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों को आगे बढ़ा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्योंगयांग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को परमाणु शक्ति के रूप में मान्यता दिलाने की रणनीति पर काम कर रहा है। इसके जरिए वह भविष्य में अपने ऊपर लगे आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने की मांग को और मजबूती देना चाहता है।
2019 के बाद और आक्रामक हुआ परमाणु कार्यक्रम
विश्लेषकों के मुताबिक, वर्ष 2019 में डोनाल्ड ट्रंप और किम जोंग उन के बीच हुई महत्वपूर्ण वार्ता विफल होने के बाद उत्तर कोरिया ने अपने परमाणु हथियारों के जखीरे को बढ़ाने पर विशेष ध्यान देना शुरू कर दिया था।तब से देश लगातार मिसाइल परीक्षणों और रक्षा परियोजनाओं को गति दे रहा है। ताजा बयान से साफ संकेत मिलता है कि निकट भविष्य में भी उत्तर कोरिया अपने परमाणु कार्यक्रम पर किसी तरह का समझौता करने के मूड में नहीं है।
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