नई दिल्ली। नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की बैठक इस बार कई मायनों में ऐतिहासिक साबित हुई। गुरुवार को आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में देश के सभी 28 राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल हुए। पिछले कुछ वर्षों में राजनीतिक मतभेदों और बहिष्कार के कारण चर्चा में रहने वाली यह बैठक इस बार सहयोग, संवाद और विकास के एजेंडे पर केंद्रित दिखाई दी। खास बात यह रही कि किसी भी राज्य के मुख्यमंत्री ने राजनीतिक विवादों को बैठक का हिस्सा नहीं बनाया और सभी ने विकास, अर्थव्यवस्था तथा अपने-अपने राज्यों की प्राथमिकताओं पर जोर दिया।
पहली बार दिखी सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों की पूरी मौजूदगी
नीति आयोग की बैठकों के इतिहास में पहली बार ऐसा देखने को मिला जब सभी 28 राज्यों के मुख्यमंत्री एक साथ बैठक में उपस्थित रहे। पिछले वर्षों में कई राज्यों के मुख्यमंत्री विभिन्न कारणों से बैठक से दूर रहे थे, जिससे केंद्र और राज्यों के संबंधों को लेकर सवाल उठते रहे थे। हालांकि इस बार तस्वीर पूरी तरह बदली हुई नजर आई।
जानकारों का मानना है कि सभी राज्यों की एकजुट भागीदारी केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर संवाद और सहकारी संघवाद की दिशा में सकारात्मक संकेत देती है। इससे विकास योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन और राज्यों की जरूरतों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी ढंग से रखने का अवसर भी मिलेगा।
डीके शिवकुमार की मौजूदगी ने खींचा ध्यान
बैठक में कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की उपस्थिति विशेष रूप से चर्चा का विषय रही। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह कर्नाटक की नीति और केंद्र के साथ संबंधों में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत माना जा रहा है। इससे पहले कांग्रेस शासित राज्य कई बार केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध जताते हुए ऐसी बैठकों से दूरी बनाते रहे थे, लेकिन इस बार कर्नाटक ने सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलपति विजय भी हुए शामिल
तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री थलपति विजय की मौजूदगी भी बैठक के प्रमुख आकर्षणों में शामिल रही। मुख्यमंत्री बनने के बाद नीति आयोग की बैठक में उनकी यह महत्वपूर्ण भागीदारी मानी जा रही है। बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी मौजूदगी की तस्वीरें भी चर्चा का केंद्र बनी रहीं।
विपक्ष शासित राज्यों ने भी दिखाई सक्रियता
इस बार कांग्रेस शासित केरल, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश और तेलंगाना के मुख्यमंत्रियों के साथ-साथ आम आदमी पार्टी शासित पंजाब के मुख्यमंत्री ने भी बैठक में भाग लिया। पिछले वर्षों में कई विपक्षी राज्यों और केंद्र सरकार के बीच तनाव की स्थिति देखने को मिलती रही थी, जिसका असर नीति आयोग की बैठकों में भी दिखाई देता था।
वर्ष 2024 में जहां 10 मुख्यमंत्री बैठक में शामिल नहीं हुए थे, वहीं 2023 में नौ मुख्यमंत्रियों ने दूरी बनाई थी। इसके मुकाबले इस बार सभी राज्यों की मौजूदगी को राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर विकास के मुद्दों पर एकजुटता का संदेश माना जा रहा है।
विकास और अर्थव्यवस्था पर रहा पूरा फोकस
बैठक के दौरान राज्यों ने बुनियादी ढांचे, निवेश, रोजगार, कृषि, उद्योग, डिजिटल विकास और सामाजिक कल्याण से जुड़े विषयों पर अपने सुझाव रखे। राजनीतिक बयानबाजी से दूर रहकर सभी राज्यों ने विकास और आर्थिक प्रगति को प्राथमिकता दी। यही वजह रही कि बैठक का माहौल सहयोगात्मक और सकारात्मक बना रहा।
केंद्र-राज्य संबंधों के लिए सकारात्मक संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि सभी राज्यों की भागीदारी भारत में सहकारी संघवाद को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी इस माहौल की सराहना करते हुए इसे केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल का संकेत बताया। माना जा रहा है कि आने वाले समय में ऐसे सहयोगात्मक प्रयास देश के समग्र विकास को नई गति दे सकते हैं।
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