तेहरान/वॉशिंगटन। पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के रिश्तों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। दोनों देशों के बीच युद्धविराम और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर एक महत्वपूर्ण अंतरिम समझौते की रूपरेखा लगभग तैयार बताई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, इस समझौते पर स्विट्जरलैंड के जिनेवा में रविवार को हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो यह हाल के वर्षों में अमेरिका और ईरान के बीच सबसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाओं में से एक माना जाएगा।
समझौते के मसौदे पर बनी सहमति
राजनयिक सूत्रों के अनुसार, दोनों पक्ष ‘मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ (MoU) के प्रारूप पर व्यापक सहमति बना चुके हैं। हालांकि अंतिम मंजूरी की प्रक्रिया अभी बाकी है। बताया जा रहा है कि जिनेवा में होने वाली बैठक के लिए छह प्रमुख बिंदुओं पर सहमति बन चुकी है, जिनके आधार पर समझौते को अंतिम रूप दिया जाएगा।
60 दिन के युद्धविराम का प्रस्ताव
समझौते के तहत हस्ताक्षर होते ही लेबनान समेत विभिन्न मोर्चों पर 60 दिनों का युद्धविराम लागू किया जा सकता है। माना जा रहा है कि इससे क्षेत्र में जारी सैन्य तनाव कम होगा और आगे की बातचीत के लिए सकारात्मक माहौल तैयार होगा।
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बड़ा फैसला
प्रस्तावित समझौते में दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने पर भी सहमति बनने की बात कही जा रही है। इसके तहत ईरान इस मार्ग से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय जहाजों से अतिरिक्त शुल्क नहीं लेगा। साथ ही समझौते पर हस्ताक्षर के लगभग 30 दिनों के भीतर समुद्री यातायात को युद्ध से पहले के सामान्य स्तर पर बहाल करने का लक्ष्य रखा गया है।
प्रतिबंधों में राहत और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा
सूत्रों का कहना है कि समझौते के बाद ईरानी बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नाकेबंदी में ढील दी जा सकती है। इसके अलावा तेहरान को कुछ आर्थिक प्रतिबंधों से राहत मिलने की संभावना भी जताई जा रही है। हालांकि ईरान की ओर से लंबे समय से उठाई जा रही अरबों डॉलर की फ्रीज संपत्तियों को जारी करने की मांग पर अभी स्पष्ट स्थिति सामने नहीं आई है।
परमाणु कार्यक्रम पर ईरान देगा आश्वासन
समझौते का सबसे महत्वपूर्ण पहलू ईरान का परमाणु कार्यक्रम माना जा रहा है। प्रस्तावित दस्तावेज के अनुसार ईरान भविष्य में परमाणु हथियार विकसित नहीं करने और इस संबंध में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आश्वासन देने पर सहमत हो सकता है। यही मुद्दा लंबे समय से अमेरिका और पश्चिमी देशों की प्रमुख चिंता रहा है।
पाकिस्तान की बढ़ सकती है वैश्विक भूमिका
कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार इस समझौते को ‘इस्लामाबाद एग्रीमेंट’ नाम दिए जाने पर भी विचार हुआ है। इसका कारण यह बताया जा रहा है कि पाकिस्तान ने दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यदि ऐसा होता है तो पाकिस्तान के लिए यह एक बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि साबित हो सकती है और उसकी अंतरराष्ट्रीय छवि को मजबूती मिल सकती है।
जिनेवा में हो सकता है हस्ताक्षर समारोह
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि समझौते को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया तेज़ी से आगे बढ़ रही है। सूत्रों के मुताबिक, स्विट्जरलैंड के जिनेवा में होने वाले संभावित हस्ताक्षर समारोह में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी शामिल हो सकते हैं। रविवार को इस समझौते पर हस्ताक्षर होने की संभावना सबसे अधिक बताई जा रही है।
पश्चिम एशिया की राजनीति पर पड़ेगा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता सफलतापूर्वक लागू हो जाता है तो न केवल अमेरिका और ईरान के बीच वर्षों से चले आ रहे तनाव में कमी आएगी, बल्कि पश्चिम एशिया की राजनीतिक और आर्थिक स्थिति पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। खासकर ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा के मोर्चे पर इसके दूरगामी परिणाम देखने को मिल सकते हैं।
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