Meerut Murder Case: अर्चिता या मुहब्बत? जली हुई लाश की पहचान पर बड़ा विवाद, विदेशी महिला ने किया चौंकाने वाला दावा

मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ में 21 फरवरी को खेत में मिली जली हुई युवती की लाश ने सनसनी फैा दी थी। पांच दिन बाद 26 फरवरी को पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ब्लाइंड मर्डर का खुलासा करते हुए चार आरोपियों की गिरफ्तारी का दावा किया और मृतका की पहचान दिल्ली निवासी अर्चिता अरोड़ा के रूप में बताई। लेकिन अब इस मामले में नया और हैरान करने वाला मोड़ आ गया है। तुर्कमेनिस्तान की एक महिला ने दावा किया है कि यह शव उसकी बेटी मुहब्बत का है।

होटल विवाद से हत्या तक, पुलिस का दावा

मेरठ पुलिस के अनुसार युवती की हत्या होटल में विवाद के बाद की गई। आरोपियों ने कथित तौर पर कंबल से मुंह दबाकर उसकी जान ली और पहचान छिपाने के लिए चेहरे पर तेजाब डाल दिया। पुलिस का कहना है कि 500 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने के बाद आरोपियों तक पहुंचा गया। अधिकारियों ने बताया कि जांच दस्तावेजों और गिरफ्तार आरोपियों के बयानों के आधार पर की गई है।

मेरठ देहात के एसपी अभिजीत कुमार ने कहा कि यदि आगे कोई नया साक्ष्य सामने आता है तो उसे जांच में शामिल किया जाएगा।

15 साल पहले भारत आई थी मुहब्बत: मां का दावा

मामले में तब नया मोड़ आया जब तुर्कमेनिस्तान में रहने वाली गुलनारा नाम की महिला सामने आई। उसने दावा किया कि मृतका भारतीय नहीं, बल्कि उसकी बेटी मुहब्बत है, जो करीब 15 साल पहले भारत आई थी और कथित रूप से दलालों के जाल में फंस गई थी। गुलनारा का कहना है कि शरीर पर बने टैटू मिटाने के लिए भी तेजाब डाला गया ताकि पहचान पूरी तरह खत्म की जा सके।

आधार कार्ड में अर्चिता अरोड़ा, फोटो विदेशी युवती की

पुलिस के मुताबिक शव के पास मिले आधार कार्ड में नाम अर्चिता अरोड़ा और पता दिल्ली का दर्ज है। हालांकि कार्ड पर लगी तस्वीर एक विदेशी युवती की बताई जा रही है, जिससे संदेह और गहरा गया है। 26 फरवरी को एक विदेशी महिला थाने भी पहुंची और उसने मृतका को मुहब्बत बताया, लेकिन पुलिस ने आधिकारिक रूप से इस दावे की पुष्टि नहीं की।

डीएनए जांच की मांग, अंतिम संस्कार पर सवाल

गुलनारा ने वीडियो कॉल के जरिए दावा किया कि उसने फोटो और ईयरिंग से अपनी बेटी को पहचाना। उसने बताया कि मुहब्बत का जन्म 25 नवंबर 1985 को हुआ था। मां ने आरोप लगाया कि परिवार को सूचना दिए बिना शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। उसने डीएनए जांच की मांग करते हुए अस्थियां सौंपने की अपील की है ताकि सच्चाई सामने आ सके।

चंडीगढ़ कनेक्शन और कॉल डिटेल्स

चंडीगढ़ में रहने वाली एलीना नाम की महिला ने भी दावा किया है कि पुलिस ने 25 फरवरी को उसे कॉल कर शव की फोटो भेजी थी। कॉल डिटेल रिकॉर्ड में उसका नंबर आखिरी बताया गया है। एलीना का कहना है कि उसने पुलिस को पहले ही बता दिया था कि युवती का नाम अर्चिता नहीं, बल्कि मुहब्बत है और 16 फरवरी से उसका फोन बंद था। इसके बावजूद 26 फरवरी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुलिस ने मृतका को अर्चिता अरोड़ा बताया।

आरोपियों की चैट में ‘मुहब्बत’ का जिक्र

जांच के दौरान गिरफ्तार एक आरोपी की चैट में ‘मुहब्बत’ नाम सामने आया है। इससे सवाल उठ रहे हैं कि यदि आरोपी इस नाम से परिचित थे तो जांच में इस पहलू को पहले क्यों उजागर नहीं किया गया।

फर्जी पहचान पत्र और मानव तस्करी का एंगल

मानव तस्करी से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि कई विदेशी महिलाओं के पास भारत में फर्जी पहचान पत्र पाए जाते हैं। आधार कार्ड नागरिकता का प्रमाण नहीं होता, बल्कि केवल पहचान पत्र है। ऐसे में इस मामले में पहचान को लेकर भ्रम और गहराता जा रहा है।

पुलिस की सफाई

मेरठ देहात के एसपी अभिजीत कुमार ने स्पष्ट किया कि अब तक की कार्रवाई उपलब्ध दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर की गई है। यदि डीएनए जांच या अन्य कोई नया तथ्य सामने आता है तो जांच की दिशा बदली जा सकती है।

मेरठ का यह मर्डर केस अब केवल हत्या की गुत्थी नहीं, बल्कि पहचान के बड़े विवाद में बदलता जा रहा है। अर्चिता अरोड़ा या मुहब्बत—सवाल अब भी कायम है।

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