
लेबनान में इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच जारी संघर्ष अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। इजरायली सेना (IDF) ने सैन्य अभियान को विस्तार देते हुए एक ऐतिहासिक और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 900 साल पुराने किले पर कब्जा कर लिया है। बताया जा रहा है कि इस इलाके पर इजरायल ने करीब 26 वर्षों बाद फिर से नियंत्रण स्थापित किया है, जिससे पूरे लेबनान में राजनीतिक और सुरक्षा हलकों में हलचल तेज हो गई है।
ऐतिहासिक किले पर इजरायल का कब्जा, बढ़ी क्षेत्रीय चिंता
इजरायली रक्षा बलों (IDF) की ओर से चलाए जा रहे सैन्य अभियान के तहत यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब सीमा क्षेत्रों में संघर्ष लगातार तेज होता जा रहा है। 900 वर्ष पुराने इस किले को रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस पर कब्जे के बाद इजरायल की सैन्य स्थिति और मजबूत होने की चर्चा शुरू हो गई है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, इस कदम ने लेबनान में सुरक्षा संबंधी चिंताओं को और बढ़ा दिया है। वहीं हिजबुल्लाह समर्थक क्षेत्रों में भी इस घटनाक्रम को लेकर बेचैनी देखी जा रही है।
हिजबुल्लाह पर दबाव बढ़ाने की रणनीति
विशेषज्ञों का मानना है कि इजरायल का उद्देश्य हिजबुल्लाह की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना और उसके प्रभाव वाले क्षेत्रों पर दबाव बढ़ाना है। हाल के महीनों में दोनों पक्षों के बीच तनाव लगातार बढ़ा है और सीमावर्ती इलाकों में कई बार बड़े हमले भी सामने आए हैं।
इजरायल अब केवल हवाई हमलों तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि जमीनी स्तर पर भी अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहा है। इसी कड़ी में यह कब्जा एक महत्वपूर्ण सैन्य उपलब्धि माना जा रहा है।
नेतन्याहू ने सेना को दिए सख्त निर्देश
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हालिया घटनाक्रम के बीच सेना को जमीनी अभियान और अधिक तेज करने के निर्देश दिए हैं। सूत्रों के मुताबिक, सरकार का मानना है कि हिजबुल्लाह के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई के लिए सैन्य दबाव लगातार बनाए रखना जरूरी है।
नेतन्याहू के निर्देशों के बाद इजरायली सेना की गतिविधियां और तेज होने की संभावना जताई जा रही है। इससे आने वाले दिनों में संघर्ष और व्यापक रूप ले सकता है।
पूरे क्षेत्र पर पड़ सकता है असर
विश्लेषकों का कहना है कि लेबनान में बढ़ती सैन्य गतिविधियां केवल दोनों पक्षों तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि इसका प्रभाव पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति पर पड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी इस संघर्ष पर लगातार नजर बनाए हुए है।
यदि जमीनी अभियान का दायरा और बढ़ता है तो क्षेत्रीय तनाव में और वृद्धि हो सकती है, जिससे नए भू-राजनीतिक समीकरण भी सामने आ सकते हैं।
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