कानपुर। शहर के वीआईपी रोड पर रविवार की दोपहर अपनी तेज रफ्तार लैंबॉर्गिनी से कोहराम मचाने वाले शिवम मिश्रा और उनके परिवार की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। इस हादसे ने न केवल शिवम की बेकाबू रफ़्तार पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि उनके पिता और मशहूर तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा (KK Mishra) के पुराने काले चिट्ठों को भी फिर से खोल दिया है। पुलिसिया कार्रवाई के बीच अब सोशल मीडिया और गूगल पर लोग केके मिश्रा के उस ‘सिंडिकेट’ को सर्च कर रहे हैं, जिस पर करोड़ों के टैक्स चोरी का आरोप लगा था।
करोड़ों का टर्नओवर और कागजों पर हेरफेर: 2024 की वो बड़ी रेड
शिवम मिश्रा के पिता केके मिश्रा की कंपनी बंशिधर टोबैको प्राइवेट लिमिटेड (Banshidhar Tobacco Pvt Ltd) साल 2024 में उस वक्त चर्चा में आई थी, जब आयकर विभाग (Income Tax) ने देश के कई राज्यों में एक साथ छापेमारी की थी। कानपुर, दिल्ली, मुंबई और गुजरात समेत 20 ठिकानों पर चली इस कार्रवाई में आयकर विभाग की 20 टीमों ने जो सच पाया, वह चौंकाने वाला था।
जांच में सामने आया कि कंपनी कागजों पर अपनी सालाना आय महज ₹20-25 करोड़ दिखाती थी, जबकि हकीकत में उनका कारोबार ₹100-150 करोड़ के बीच था। अधिकारियों ने पाया कि कंपनी ने न केवल इनकम टैक्स कानूनों का उल्लंघन किया, बल्कि GST चोरी के लिए लेजर्स में भी भारी हेरफेर की थी।
50 करोड़ का कार कलेक्शन और सबका ‘4018’ नंबर
आयकर विभाग जब दिल्ली के वसंत विहार स्थित शिवम मिश्रा के बंगले पर पहुंचा, तो वहां खड़ी लग्जरी कारों की कतार देख अधिकारी भी दंग रह गए। शिवम के पास करीब ₹50 करोड़ का कार कलेक्शन था, जिसमें ₹16 करोड़ की रोल्स-रॉयस फैंटम, मैकलारेन और पोर्शे शामिल थीं।
हैरानी की बात यह थी कि इन सभी कारों का नंबर ‘4018’ था। इसी कलेक्शन में वह लैंबॉर्गिनी Revuelto भी शामिल थी, जिससे रविवार को शिवम ने सड़क पर मासूमों को रौंदा। छापेमारी के दौरान करोड़ों के कैश के अलावा हीरों से जड़ी एक घड़ी भी मिली थी, जिसकी कीमत अकेले ₹2.5 करोड़ आंकी गई थी।
कैश, जेवरात और ऑफशोर खातों का जाल
IT रेड के दौरान जांचकर्ताओं को भारी मात्रा में बेनामी संपत्ति के दस्तावेज मिले थे। अधिकारियों ने शुरुआती छापेमारी में ₹4.5 करोड़ नकद बरामद किए थे, जो बाद की तलाशी में बढ़कर ₹11.5 करोड़ (नकद और जेवरात मिलाकर) तक पहुंच गया था। इसके अलावा, कंपनी पर ऑफशोर खातों के जरिए पैसा छिपाने का भी गहरा संदेह जताया गया था।
केके मिश्रा की यह कंपनी बड़े-बड़े पान मसाला समूहों को कच्चे माल की सप्लाई करती है, जिससे इनका सिंडिकेट बेहद प्रभावशाली माना जाता है। हादसे के बाद अब यह सवाल उठ रहे हैं कि क्या रईसी के इस नशे ने ही शिवम को कानून और इंसानी जान की परवाह न करने के लिए उकसाया?
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