तेहरान। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने एक बार फिर अमेरिका और इजरायल को लेकर तीखा बयान दिया है। ईरान की सैन्य ताकत मानी जाने वाली इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दावा किया है कि ईरान को कमजोर आंकने की रणनीति अमेरिका और इजरायल पर ही भारी पड़ गई। उन्होंने कहा कि विरोधी देशों का मकसद ईरान को झुकाना था, लेकिन नतीजा इसके उलट निकला और आज ईरान पहले से कहीं ज्यादा मजबूत स्थिति में खड़ा है।
अमेरिका और इजरायल का आकलन हुआ गलत: IRGC अधिकारी
इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज एजेंसी (IRNA) को दिए गए इंटरव्यू में आईआरजीसी के राजनीतिक मामलों के उप प्रमुख यादोल्लाह जावानी ने कहा कि अमेरिका और इजरायल ने ईरान की सैन्य क्षमता, जनसमर्थन और राष्ट्रीय संकल्प को समझने में गंभीर गलती की। उनका कहना है कि विरोधी देशों को उम्मीद थी कि दबाव, प्रतिबंध और सैन्य कार्रवाई के जरिए ईरान को जल्द कमजोर किया जा सकेगा, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया।
जावानी ने कहा कि तमाम चुनौतियों और अंतरराष्ट्रीय दबावों के बावजूद ईरान ने अपनी रणनीतिक स्थिति को और मजबूत किया है। वहीं, उनके अनुसार अमेरिका लगातार क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर कई मोर्चों पर असफलताओं और गिरावट का सामना कर रहा है।
‘जंग थोपकर त्वरित जीत हासिल करने का सपना टूटा’
आईआरजीसी अधिकारी ने दावा किया कि ईरान के दुश्मनों ने यह अनुमान लगाया था कि सैन्य दबाव बनाकर और युद्ध जैसी परिस्थितियां पैदा कर वे जल्दी सफलता हासिल कर लेंगे। हालांकि, उनका कहना है कि यह रणनीति पूरी तरह विफल साबित हुई और ईरानी नेतृत्व तथा सुरक्षा तंत्र ने हर चुनौती का मजबूती से सामना किया।
जावानी के अनुसार, अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का दौर 28 फरवरी को हवाई हमलों के साथ शुरू हुआ था। उन्होंने आरोप लगाया कि इन कार्रवाइयों का उद्देश्य ईरान की शक्ति को कमजोर करना और क्षेत्र में उसके प्रभाव को कम करना था, लेकिन विरोधी देशों को अपेक्षित परिणाम नहीं मिले।
ट्रंप को भी दी चेतावनी, कहा- विकल्प सीमित रह गए
आईआरजीसी के वरिष्ठ अधिकारी ने अमेरिकी नेतृत्व, विशेष रूप से पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को चेतावनी देते हुए कहा कि ईरान के खिलाफ दबाव की नीति सफल नहीं हुई है। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका के सामने अब बेहद सीमित विकल्प बचे हैं और उसे क्षेत्रीय वास्तविकताओं को स्वीकार करना होगा।
हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि अमेरिका के पास कौन-कौन से विकल्प शेष हैं, लेकिन उनके बयान को ईरान की ओर से एक कड़े राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
मध्य पूर्व में बढ़ सकता है तनाव
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच जारी बयानबाजी क्षेत्र में पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा सकती है। हाल के महीनों में पश्चिम एशिया में सुरक्षा हालात लगातार संवेदनशील बने हुए हैं और विभिन्न पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।ईरान की ओर से आया यह नया बयान ऐसे समय में सामने आया है जब क्षेत्रीय सुरक्षा, सैन्य गतिविधियों और कूटनीतिक प्रयासों पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।
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