
काठमांडू: नेपाल की राजनीति में इस वक्त युवा नेतृत्व का दौर तेज़ी से उभरता दिख रहा है। हालिया चुनाव में प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में आए 35 वर्षीय प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह (बालेन शाह) न सिर्फ देश के सबसे युवा पीएम बने हैं, बल्कि उनकी कैबिनेट भी एक खास वजह से चर्चा में है—इसमें भारत में पढ़े-लिखे नेताओं की मजबूत मौजूदगी।
नेपाल की 15 सदस्यीय कैबिनेट में करीब एक-तिहाई मंत्री ऐसे हैं, जिन्होंने अपनी उच्च शिक्षा भारत के प्रतिष्ठित संस्थानों से हासिल की है। खुद प्रधानमंत्री से लेकर स्वास्थ्य, शहरी विकास और प्रशासन जैसे अहम मंत्रालयों के प्रमुख इस सूची में शामिल हैं।
भारत कनेक्शन: कैबिनेट में दिखी ‘इंडियन एजुकेशन’ की छाप
नेपाल की नई सरकार में शिक्षा का अंतरराष्ट्रीय अनुभव साफ झलकता है। प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने बेंगलुरु स्थित निट्टे मीनाक्षी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग में एमटेक किया है। 2016 से 2018 के बीच भारत में पढ़ाई के दौरान उन्होंने तकनीकी कौशल हासिल किया, जो अब शासन में उनके फैसलों में झलकता है।
उनके अलावा कैबिनेट के कई चेहरे भारत से शिक्षित हैं, जो नेपाल-भारत शैक्षणिक संबंधों को और मजबूत बनाते हैं।
सुनील लमसाल: इंफ्रास्ट्रक्चर की कमान संभालने वाला युवा चेहरा
35 वर्षीय सुनील लमसाल को शहरी विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी दी गई है। दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने भी निट्टे मीनाक्षी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री हासिल की है। तकनीकी पृष्ठभूमि के कारण उनसे नेपाल के इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में बड़े बदलाव की उम्मीद की जा रही है।
निशा मेहता: AIIMS से पढ़कर बनीं नेपाल की हेल्थ मिनिस्टर
नेपाल की नई स्वास्थ्य मंत्री निशा मेहता ने नई दिल्ली के प्रतिष्ठित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान से नर्सिंग की पढ़ाई की है। 2006 से 2010 के बीच उन्होंने यहां प्रशिक्षण लिया। इसके अलावा वे ग्वालियर यूनिवर्सिटी की भी छात्रा रही हैं। चिकित्सा क्षेत्र में उनके अनुभव को अब देश की स्वास्थ्य व्यवस्था सुधारने में अहम माना जा रहा है।
प्रतिभा रावल: पत्रकारिता से राजनीति तक का सफर
प्रतिभा रावल को संघीय मामले, सामान्य प्रशासन, सहकारिता और गरीबी उन्मूलन मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है। उन्होंने चेन्नई के एशियन कॉलेज ऑफ जर्नलिज्म से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। उनकी नियुक्ति महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का भी संकेत है, क्योंकि कैबिनेट में पांच महिला मंत्री शामिल हैं।
युवा लहर और बदलती राजनीति
नेपाल में बीते साल हुए जनआंदोलनों के बाद सत्ता परिवर्तन हुआ था। पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार गिरने के बाद अंतरिम दौर आया और फिर चुनाव में युवा चेहरों को भारी समर्थन मिला। इसी का नतीजा है कि आज देश की बागडोर युवा प्रधानमंत्री के हाथों में है।
पहले भी रहा है भारत से गहरा शैक्षणिक रिश्ता
नेपाल और भारत के बीच शिक्षा का संबंध नया नहीं है। पूर्व प्रधानमंत्री बाबूराम भट्टराई ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय और चंडीगढ़ कॉलेज ऑफ आर्किटेक्चर से पढ़ाई की थी। वहीं नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में डिग्री हासिल की थी।
नेपाल-भारत संबंधों को मिलेगा नया आयाम?
विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत में शिक्षित नेताओं की बढ़ती संख्या नेपाल की नीतियों में व्यावहारिकता और क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा दे सकती है। इससे दोनों देशों के बीच शिक्षा, तकनीक और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में साझेदारी और मजबूत होने की संभावना है।
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