
ईरान में जारी युद्ध जैसे हालात के कारण दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक होर्मुज स्ट्रेट में कई देशों के जहाजों के साथ भारतीय जहाज भी फंस गए हैं। इस स्थिति को देखते हुए भारत सरकार लगातार निगरानी कर रही है और फंसे हुए जहाजों को सुरक्षित निकालने की रणनीति पर तेजी से काम कर रही है। इसी बीच मुंबई डायरेक्टरी की ओर से जारी ताजा रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक ऐसे 22 भारतीय जहाजों की पहचान कर ली गई है जिन्हें समुद्री रास्ता साफ होते ही सबसे पहले बाहर निकाला जाएगा।
होर्मुज स्ट्रेट में फंसे जहाजों को लेकर तेज हुई हलचल
मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और युद्ध जैसी स्थिति का असर वैश्विक समुद्री व्यापार पर साफ दिखाई दे रहा है। खासकर होर्मुज स्ट्रेट, जिसे दुनिया के सबसे व्यस्त तेल और व्यापारिक समुद्री मार्गों में गिना जाता है, वहां सुरक्षा जोखिम काफी बढ़ गया है। इसी कारण कई देशों के जहाजों को एहतियातन रुकना पड़ा है।
रिपोर्ट के अनुसार भारतीय जहाजों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। समुद्री मार्ग सुरक्षित होते ही इन जहाजों को चरणबद्ध तरीके से बाहर निकालने की योजना तैयार की गई है।
मुंबई डायरेक्टरी ने 22 जहाजों की पहचान की
मुंबई डायरेक्टरी की तरफ से जारी रिपोर्ट में बताया गया है कि उन्होंने ऐसे 22 जहाजों की पहचान कर ली है जो इस समय प्रभावित क्षेत्र में मौजूद हैं। इन जहाजों को प्राथमिकता के आधार पर निकाला जाएगा।
विशेषज्ञों के मुताबिक यह कदम इसलिए भी अहम है क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट से होकर दुनिया के बड़े हिस्से का तेल और व्यापारिक माल गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का अवरोध वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित कर सकता है।
सरकार लगातार संपर्क में, सुरक्षा पर खास जोर
सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार, शिपिंग कंपनियों और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए है। जहाजों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हर स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
समुद्री मार्ग सुरक्षित होते ही भारतीय जहाजों को बाहर निकालने के लिए विशेष समन्वय योजना तैयार की गई है। इसके तहत नौवहन से जुड़ी एजेंसियां और संबंधित कंपनियां मिलकर काम करेंगी ताकि जहाजों और चालक दल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
वैश्विक व्यापार पर भी पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट में तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल की सप्लाई पर भी पड़ सकता है। यही वजह है कि भारत समेत कई देश अपने जहाजों की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और सुरक्षित मार्ग खुलने का इंतजार कर रहे हैं।
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