
चिशिनाउ। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को मोल्दोवा पहुंचकर इतिहास रच दिया। यह किसी भी भारतीय राष्ट्रपति की इस पूर्वी यूरोपीय देश की पहली राजकीय यात्रा है। ऐसे समय में यह दौरा हो रहा है जब मोल्दोवा क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों और रूस-यूक्रेन युद्ध के प्रभावों के बीच अपनी रणनीतिक स्थिति को लेकर लगातार चर्चा में बना हुआ है। राष्ट्रपति मुर्मू की यह यात्रा भारत के तीन देशों के यूरोप दौरे का अहम हिस्सा मानी जा रही है, जिसका उद्देश्य व्यापार, प्रौद्योगिकी, निवेश, पर्यटन और द्विपक्षीय सहयोग को नई गति देना है।
राष्ट्रपति भवन में हुआ औपचारिक स्वागत, गार्ड ऑफ ऑनर से किया गया सम्मानित
मोल्दोवा की राजधानी चिशिनाउ पहुंचने पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत किया गया। इस दौरान उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर भी प्रदान किया गया। इसके बाद राष्ट्रपति मुर्मू ने मोल्दोवा की राष्ट्रपति मैया सैंडू के साथ द्विपक्षीय वार्ता की।
बैठक में दोनों नेताओं ने भारत और मोल्दोवा के बीच राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और लोगों के बीच संबंधों की समीक्षा की। साथ ही भविष्य में सहयोग के नए क्षेत्रों को विकसित करने पर भी विस्तार से चर्चा हुई। वार्ता के दौरान विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज सहित दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
भारत-मोल्दोवा बिजनेस फोरम में राष्ट्रपति ने निवेश और व्यापार पर दिया जोर
अपने दौरे के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारत-मोल्दोवा बिजनेस फोरम को भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भारत साझा समृद्धि और टिकाऊ आर्थिक विकास के लिए विश्वसनीय अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को प्राथमिकता देता है।
राष्ट्रपति ने कहा कि भारत मोल्दोवा की कंपनियों के लिए व्यापार, निवेश और कारोबारी विस्तार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराता है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भारत पारदर्शी, विश्वसनीय और निवेशकों के अनुकूल कारोबारी वातावरण तैयार करने के लिए लगातार काम कर रहा है।
पहली राजकीय यात्रा को बताया ऐतिहासिक, रिश्तों को नई ऊंचाई देने पर जोर
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि किसी भारतीय राष्ट्रपति की यह पहली राजकीय यात्रा दोनों देशों के रिश्तों में एक नया अध्याय जोड़ने वाली है। उन्होंने इसे भारत की उस प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया, जिसके तहत मोल्दोवा के साथ राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और जन-जन के संबंधों को और मजबूत किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि उनके साथ भारत का एक बड़ा व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भी मोल्दोवा आया है, जिससे दोनों देशों के उद्योग, निवेश और व्यापारिक सहयोग को और अधिक गति मिलने की उम्मीद है।
रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच बढ़ा मोल्दोवा का रणनीतिक महत्व
पूर्वी यूरोप में स्थित मोल्दोवा एक छोटा लेकिन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण देश है। यह चारों ओर से जमीन से घिरा हुआ है और लंबे समय से क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों का सामना करता रहा है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद इस देश का सामरिक महत्व और बढ़ गया है। ऐसे समय में भारत के राष्ट्रपति का यह ऐतिहासिक दौरा दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।
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