नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच छिड़ी भीषण जंग ने भारत की चिंताएं बढ़ा दी हैं। युद्ध के मैदान में तब्दील हो चुके खाड़ी क्षेत्र में लाखों भारतीयों की सुरक्षा को लेकर मोदी सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। इसी बीच भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान बिन जासिम अल थानी से फोन पर लंबी बातचीत की है। इस हाई-लेवल वार्ता का मुख्य केंद्र युद्ध के बीच भारतीय समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करना रहा।
कतर से मिला सुरक्षा का भरोसा, जयशंकर ने जताई गहरी चिंता
ईरान पर इजरायल और अमेरिका के साझा हमलों के बाद मिडिल ईस्ट के हालात पल-पल बिगड़ रहे हैं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि कतर के प्रधानमंत्री ने उन्हें क्षेत्र की ताजा स्थिति से अवगत कराया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि कतर ने वहां रह रहे भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा और भलाई को लेकर भारत को पूर्ण आश्वासन दिया है। भारत के लिए यह राहत की खबर है, क्योंकि युद्ध की लपटें अब कतर, कुवैत और यूएई जैसे पड़ोसी देशों तक भी पहुंचने लगी हैं।
ईरान और इजरायल के विदेश मंत्रियों से भी साधा संपर्क
भारत केवल मूकदर्शक बनकर नहीं बैठा है। एस. जयशंकर ने कतर के अलावा ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची और इजराइली समकक्ष गिदोन सार से भी फोन पर चर्चा की है। जयशंकर ने ईरान को स्पष्ट रूप से भारत की “गहरी चिंता” से अवगत कराया। गौरतलब है कि इजरायली हमलों के जवाब में ईरान ने कतर, कुवैत और यूएई में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है, जिससे युद्ध के और अधिक फैलने का खतरा पैदा हो गया है।
भारत की दोटूक अपील: ‘संयम बरतें और कूटनीति से सुलझाएं विवाद’
युद्ध के भीषण होते स्वरूप को देखते हुए भारत सरकार ने आधिकारिक बयान जारी कर सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। विदेश मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि किसी भी देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन नहीं होना चाहिए। भारत ने साफ किया कि हिंसा किसी समस्या का समाधान नहीं है; तनाव कम करने के लिए “वार्ता और कूटनीति” ही एकमात्र रास्ता है। भारत ने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखने की बात कही है।
भारतीय मिशन अलर्ट पर, नागरिकों के लिए जारी हुई एडवाइजरी
खाड़ी क्षेत्र में बदलती परिस्थितियों के बीच वहां स्थित भारतीय दूतावास और मिशन लगातार भारतीय नागरिकों के संपर्क में हैं। विदेश मंत्रालय ने प्रवासियों के लिए विशेष परामर्श (Advisory) जारी किया है, जिसमें उन्हें सतर्क रहने और स्थानीय सुरक्षा दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करने को कहा गया है। सरकार की प्राथमिकता है कि युद्धग्रस्त इलाकों में फंसे एक-एक भारतीय को सुरक्षित रखा जाए।
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