India Cyprus Pact: भारत-साइप्रस डिफेंस डील से तुर्की में बढ़ी बेचैनी, IMEC कॉरिडोर पर मोदी सरकार का बड़ा रणनीतिक दांव

नई दिल्ली/अंकारा: भारत और साइप्रस के बीच बढ़ती रणनीतिक नजदीकियों ने तुर्की की चिंता बढ़ा दी है। प्रधानमंत्री Narendra Modi और साइप्रस के राष्ट्रपति Nikos Christodoulides के बीच नई दिल्ली में हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद दोनों देशों ने अपने रिश्तों को “रणनीतिक साझेदारी” में बदलने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इस दौरान रक्षा सहयोग को लेकर पांच साल का रोडमैप तैयार किया गया, जिसे क्षेत्रीय भू-राजनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।

हालांकि साइप्रस एक छोटा देश है और उसकी सैन्य ताकत सीमित है, लेकिन इसके बावजूद भारत के साथ उसकी बढ़ती साझेदारी ने तुर्की की रणनीतिक चिंताओं को बढ़ा दिया है। इसकी सबसे बड़ी वजह ‘इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर’ यानी IMEC है, जिसका प्रस्तावित मार्ग साइप्रस के आसपास से गुजरता है।

IMEC कॉरिडोर पर भारत का फोकस, तुर्की की बढ़ी टेंशन

भारत लंबे समय से IMEC कॉरिडोर को एशिया और यूरोप के बीच व्यापार और कनेक्टिविटी का नया केंद्र बनाने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में साइप्रस की भौगोलिक स्थिति भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बन जाती है। यही कारण है कि नई दिल्ली और निकोसिया के बीच समुद्री परिवहन, रक्षा और तकनीकी सहयोग को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-साइप्रस समुद्री परिवहन समझौता तुर्की के लिए एक मजबूत कूटनीतिक संदेश माना जा रहा है। दरअसल, पूर्वी भूमध्यसागर क्षेत्र में तुर्की और साइप्रस के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ है और अब भारत की सक्रिय मौजूदगी इस समीकरण को और दिलचस्प बना सकती है।

रक्षा, साइबर सुरक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़ेगा सहयोग

बैठक के दौरान दोनों देशों ने रक्षा सहयोग के अलावा साइबर सुरक्षा पर बातचीत शुरू करने का फैसला किया। इसके साथ ही समुद्री सुरक्षा, अंतरिक्ष, स्वास्थ्य और तकनीकी क्षेत्रों में साझेदारी को मजबूत करने पर सहमति बनी।

भारत और साइप्रस के बीच कुल छह महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इनमें आतंकवाद-रोधी उपायों के लिए संयुक्त कार्य समूह का गठन, राजनयिक प्रशिक्षण, इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी, खोज एवं बचाव अभियानों में सहयोग और उच्च शिक्षा व सांस्कृतिक आदान-प्रदान से जुड़े समझौते शामिल हैं।

तुर्की-पाकिस्तान समीकरण पर भी हुई चर्चा

सूत्रों के मुताबिक दोनों नेताओं के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा हालात पर भी विस्तार से चर्चा हुई। खासतौर पर तुर्की और पाकिस्तान के बढ़ते रिश्तों को लेकर दोनों देशों ने साझा चिंता जाहिर की। माना जा रहा है कि पिछले साल भारत-पाकिस्तान तनाव के दौरान तुर्की द्वारा पाकिस्तान का खुलकर समर्थन किए जाने का मुद्दा भी बातचीत में उठा।

इसके अलावा तुर्की और साइप्रस के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवाद पर भी विचारों का आदान-प्रदान हुआ। ऐसे में भारत और साइप्रस की यह नई रणनीतिक साझेदारी आने वाले समय में पूर्वी भूमध्यसागर की राजनीति पर असर डाल सकती है।

भारत की नई रणनीति से बदल सकते हैं क्षेत्रीय समीकरण

विश्लेषकों का कहना है कि भारत अब केवल दक्षिण एशिया तक सीमित रणनीति नहीं अपना रहा, बल्कि यूरोप और भूमध्यसागर क्षेत्र में भी अपने प्रभाव को मजबूत करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। साइप्रस के साथ बढ़ती नजदीकियां इसी व्यापक रणनीतिक सोच का हिस्सा मानी जा रही हैं।

IMEC कॉरिडोर, समुद्री सुरक्षा और तकनीकी सहयोग जैसे मुद्दों पर भारत की सक्रियता यह संकेत दे रही है कि आने वाले वर्षों में नई दिल्ली वैश्विक व्यापार और भू-राजनीति में अपनी भूमिका को और मजबूत करने की तैयारी कर रही है।

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