
मथुरा जिले के फालैन गांव में होलिका दहन के दौरान एक बार फिर सदियों पुरानी परंपरा ने लोगों को रोमांचित कर दिया। ब्रज क्षेत्र में होली का उत्सव वैसे ही खास होता है, लेकिन फालैन की ‘प्रह्लाद दौड़’ इसे देश-विदेश में अलग पहचान देती है। इस अनोखी परंपरा के केंद्र में रहे संजू पांडा, जिन्होंने जलती होलिका की अग्नि के बीच से नंगे पांव दौड़ लगाकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
फालैन गांव में सजी आस्था की अद्भुत तस्वीर
मथुरा जनपद के फालैन गांव में होलिका दहन की रात हजारों श्रद्धालु एकत्रित हुए। परंपरा के अनुसार विशाल होलिका जलाई गई और अग्नि प्रज्ज्वलित होते ही ‘प्रह्लाद दौड़’ की तैयारी शुरू हुई। ढोल-नगाड़ों और जयकारों के बीच संजू पांडा ने मंदिर से दौड़ शुरू की और धधकती होलिका की लपटों के बीच से निकल गए। इस दृश्य को देखने के लिए आसपास के जिलों के साथ-साथ दूरदराज से भी लोग पहुंचे।
कौन हैं संजू पांडा?
संजू पांडा फालैन गांव के पारंपरिक पुजारी परिवार से जुड़े माने जाते हैं। वर्षों से उनके परिवार द्वारा यह रस्म निभाई जाती रही है। मान्यता है कि जिस प्रकार भगवान भक्त प्रह्लाद को अग्नि से सुरक्षित निकाला गया था, उसी आस्था का प्रतीक यह दौड़ है। संजू पांडा इस परंपरा को निभाने से पहले कई दिनों तक विशेष व्रत, पूजा और अनुष्ठान करते हैं।
प्रह्लाद की कथा से जुड़ी है परंपरा
हिंदू मान्यता के अनुसार दैत्यराज हिरण्यकश्यप की बहन होलिका को वरदान प्राप्त था कि वह अग्नि में नहीं जलेगी, लेकिन जब उसने भक्त प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में प्रवेश किया तो स्वयं भस्म हो गई और प्रह्लाद सुरक्षित रहे। उसी घटना की स्मृति में होलिका दहन किया जाता है। फालैन गांव में यह परंपरा इसी कथा का जीवंत रूप मानी जाती है।
सुरक्षा और तैयारियों पर रहता है विशेष ध्यान
प्रशासन और गांव के लोग मिलकर इस आयोजन की तैयारी करते हैं। होलिका दहन से पहले लकड़ियों का विशाल ढेर सजाया जाता है। अग्नि प्रज्वलन के बाद तय समय पर दौड़ होती है। मौके पर पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी मौजूद रहती हैं ताकि किसी प्रकार की अनहोनी न हो।
देश-विदेश में चर्चा का केंद्र
ब्रज की होली की चर्चा हर साल देश-विदेश में होती है। फालैन की ‘प्रह्लाद दौड़’ सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल होती है। श्रद्धालु इसे चमत्कार और अटूट आस्था का प्रतीक मानते हैं।
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