इजरायल-लेबनान के बीच ऐतिहासिक शांति वार्ता: 14 मई को वाशिंगटन में जुटेगा कुनबा, क्या हिजबुल्लाह का हथियार डालना है मुमकिन?

वाशिंगटन/बेरूत: मिडिल ईस्ट में पिछले दो दशकों से जारी अस्थिरता और संघर्ष के बीच शांति की एक नई किरण दिखाई दे रही है। अमेरिकी विदेश विभाग ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि इजरायल और लेबनान के बीच व्यापक सुरक्षा और शांति समझौते को लेकर अगले दौर की निर्णायक वार्ता 14 और 15 मई (2026) को वाशिंगटन में आयोजित की जाएगी। अमेरिका इस ऐतिहासिक चर्चा की मेजबानी और मध्यस्थता करेगा, जिसका उद्देश्य क्षेत्र में स्थाई शांति बहाल करना है।

ट्रंप की अगुवाई में ‘पुरानी नीतियों’ को बदलने की तैयारी

अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता थॉमस ‘टॉमी’ पिगोट के अनुसार, यह आगामी बैठक 23 अप्रैल को हुई उस उच्च-स्तरीय चर्चा की अगली कड़ी है, जिसका नेतृत्व स्वयं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने किया था। अमेरिका का स्पष्ट मानना है कि पिछले बीस वर्षों की ‘विफल नीतियों’ ने न केवल लेबनान की संप्रभुता को कमजोर किया, बल्कि हिजबुल्लाह जैसे सशस्त्र समूहों को अपनी जड़ें जमाने का मौका दिया। अब वाशिंगटन एक ऐसा ढांचा तैयार करना चाहता है जो इजरायल की उत्तरी सीमा को सुरक्षित करे और लेबनान में राजकीय सत्ता को पूरी तरह बहाल करे।

शांति की सबसे बड़ी चुनौती: हिजबुल्लाह का निशस्त्रीकरण

इस शांति वार्ता के एजेंडे में सबसे संवेदनशील मुद्दा हिजबुल्लाह का पूर्ण निशस्त्रीकरण है। अमेरिका ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी स्थाई शांति समझौते की पहली शर्त यह है कि लेबनान के भीतर हिजबुल्लाह जैसे किसी भी गैर-राज्य सशस्त्र समूह के पास हथियार न रहें।

  • आतंकवादी संगठन का दर्जा: अमेरिका हिजबुल्लाह को एक ‘विदेशी आतंकवादी संगठन’ मानता है।

  • सुरक्षा गारंटी: इजरायल का कहना है कि जब तक उसकी सीमा पर सशस्त्र हिजबुल्लाह सक्रिय है, तब तक उसके नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती।

युद्ध और शांति के बीच का संघर्ष

भले ही वाशिंगटन में डिप्लोमैटिक टेबल सज रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत अब भी चिंताजनक बनी हुई है। दक्षिण लेबनान में इजरायली सैन्य अभियान और हिजबुल्लाह के जवाबी हमले जारी हैं। हालांकि, हालिया 10 दिवसीय युद्धविराम और उसके बाद मिले तीन हफ्ते के विस्तार ने कूटनीति के लिए थोड़ा समय जरूर दिया है। 14-15 मई की इस वार्ता में इजरायली प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व रॉन डर्मर और लेबनानी पक्ष का नेतृत्व साइमन करम करेंगे।

पूरी दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या अमेरिकी मध्यस्थता इस बार दशकों पुराने इस जख्म को भर पाएगी या हिजबुल्लाह का विरोध एक बार फिर शांति की कोशिशों पर पानी फेर देगा।

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