
भारत का महत्वाकांक्षी ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गया है। वैश्विक ऊर्जा संकट और पश्चिम एशिया में तनावपूर्ण हालात के बीच इस प्रोजेक्ट को लेकर भारत की समुद्री रणनीति और अधिक मजबूत होती दिख रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह परियोजना भविष्य में मलक्का जलडमरूमध्य जैसे अहम समुद्री मार्गों पर भारत की स्थिति को काफी प्रभावशाली बना सकती है, जिसका सीधा असर चीन की आर्थिक और आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ सकता है।
वैश्विक संकट ने बढ़ाई ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट की अहमियत
पश्चिम एशिया में ईरान युद्ध जैसे हालात और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में बाधाओं की आशंका ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को झटका दिया है। इस स्थिति ने न केवल भारत और चीन को प्रभावित किया, बल्कि पूरी दुनिया की सप्लाई चेन की कमजोरियों को भी उजागर कर दिया है। इसी बीच भारत का ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट, जिसे रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, फिर से गति पकड़ता दिख रहा है। यह प्रोजेक्ट अंडमान-निकोबार द्वीप समूह को एक बड़े डिफेंस और लॉजिस्टिक हब के रूप में विकसित करने की दिशा में अहम कदम है।
मलक्का जलडमरूमध्य पर रणनीतिक समीकरण
ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा रणनीतिक महत्व मलक्का जलडमरूमध्य (Strait of Malacca) के पास इसकी भौगोलिक स्थिति से जुड़ा है। यह समुद्री मार्ग चीन के लिए ऊर्जा और व्यापार का सबसे महत्वपूर्ण रास्ता माना जाता है। रिपोर्टों के अनुसार, इस मार्ग पर किसी भी तरह की बाधा चीन की अर्थव्यवस्था को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है। यही कारण है कि भारत के इस प्रोजेक्ट को लेकर चीन की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।
चीन की ‘मलक्का डिलेमा’ और भारत की बढ़ती रणनीतिक ताकत
चीन लंबे समय से ‘मलक्का डिलेमा’ की स्थिति का सामना कर रहा है, जहां उसकी ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी संकीर्ण समुद्री मार्ग पर निर्भर है। ऐसे में अगर किसी संकट की स्थिति में भारत इस क्षेत्र में अपनी रणनीतिक उपस्थिति मजबूत करता है, तो चीन के समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे चीन का पश्चिम एशिया, दक्षिण एशिया और अफ्रीका से समुद्री संपर्क भी प्रभावित हो सकता है।
वैश्विक सप्लाई चेन और भू-राजनीति पर असर
ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट सिर्फ एक इंफ्रास्ट्रक्चर विकास योजना नहीं, बल्कि एक बड़े भू-राजनीतिक बदलाव की ओर इशारा करता है। यह परियोजना भारत को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक मजबूत रणनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित कर सकती है। वहीं चीन के लिए यह स्थिति और अधिक चुनौतीपूर्ण बन सकती है क्योंकि उसके व्यापारिक समुद्री मार्गों पर दबाव बढ़ने की आशंका है।
निष्कर्ष: बदलते वैश्विक समीकरण में भारत की रणनीतिक बढ़त
बदलते वैश्विक हालात में ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट भारत की समुद्री रणनीति का एक अहम हिस्सा बनता जा रहा है। इससे न केवल भारत की रणनीतिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि चीन की आर्थिक निर्भरता वाले समुद्री मार्गों पर भी अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ सकता है।
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