
मॉस्को सुरक्षा फोरम में भारत का कड़ा संदेश{- रूस की राजधानी मॉस्को में आयोजित सिक्योरिटी फोरम में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने वैश्विक मंच पर आतंकवाद को लेकर दोहरे मानदंड अपनाने वाली ताकतों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने स्पष्ट कहा कि आतंकवाद के खिलाफ दुनिया को एक समान और बिना किसी भेदभाव के नीति अपनानी होगी, अन्यथा वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था कमजोर होती जाएगी।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की जोरदार मांग{- अपने संबोधन में अजित डोभाल ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में तत्काल सुधारों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में ग्लोबल साउथ के देशों की आवाज को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा है, जो अंतरराष्ट्रीय संतुलन के लिए बेहद जरूरी है। डोभाल ने यह भी कहा कि वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में विकासशील देशों की भागीदारी बढ़ाना समय की मांग है।
आतंकवाद और क्षेत्रीय संघर्षों पर चिंता{- डोभाल ने अपने भाषण में आतंकवाद के साथ-साथ ईरान युद्ध से उत्पन्न हो रहे खतरों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव केवल उसी क्षेत्र को नहीं बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा स्थिति को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय को मिलकर स्थायी समाधान की दिशा में काम करना होगा।
वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूत करने पर जोर:- एनएसए अजित डोभाल ने कहा कि ग्लोबल साउथ के देशों की चिंताओं और हितों को अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने जोर देकर कहा कि वैश्विक संस्थानों में सुधार कर विकासशील देशों को अधिक प्रभावशाली भूमिका दी जानी चाहिए, ताकि अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था अधिक संतुलित और न्यायपूर्ण बन सके।अजित डोभाल का मॉस्को से बड़ा संदेश: आतंकवाद पर दोहरे रवैये की आलोचना, UN सुधार और ग्लोबल साउथ की आवाज उठाई|
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