
हर तीन साल में आने वाला पवित्र अवसर, मलमास पूर्णिमा का धार्मिक महत्व बढ़ा खास
हिंदू पंचांग के अनुसार मलमास या अधिक मास की पूर्णिमा एक अत्यंत पवित्र और दुर्लभ तिथि मानी जाती है, जो लगभग हर तीन वर्ष में एक बार आती है। इस अवसर को भगवान विष्णु की आराधना, व्रत, स्नान और दान-पुण्य के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन किए गए शुभ कार्य कई गुना फल प्रदान करते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करते हैं।
पूर्णिमा तिथि का शुभ समय, कब से कब तक रहेगा प्रभाव
इस वर्ष मलमास पूर्णिमा की तिथि को लेकर शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व बताया जा रहा है। पंचांग के अनुसार पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ 30 मई को दोपहर 11 बजकर 57 मिनट पर होगा, जबकि इसका समापन 31 मई को दोपहर 2 बजकर 14 मिनट पर होगा। इस अवधि में धार्मिक कार्यों की विशेष मान्यता होती है।
उदय तिथि के अनुसार व्रत का निर्धारण
ज्योतिषीय मान्यताओं और उदया तिथि के आधार पर मलमास पूर्णिमा का व्रत 30 मई को रखा जाएगा। इस दिन श्रद्धालु उपवास रखकर भगवान विष्णु की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं और अपने जीवन में सुख-शांति की कामना करते हैं।
31 मई को होगा स्नान-दान और धार्मिक अनुष्ठान
धार्मिक परंपराओं के अनुसार स्नान-दान और पूजा-पाठ का मुख्य कार्य 31 मई को किया जाएगा। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, दान-पुण्य और विष्णु आराधना का विशेष महत्व होता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन किया गया दान कई गुना फल देता है और पापों का नाश करता है।
धार्मिक महत्व और मान्यताएं
मलमास पूर्णिमा को आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का विशेष अवसर माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की उपासना से जीवन में नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मकता का संचार होता है। भक्त इस दिन व्रत रखकर अपने जीवन में सुख, समृद्धि और शांति की कामना करते हैं।
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