
वॉशिंगटन से सामने आए एक इंटरव्यू में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान, इजरायल और पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव को लेकर कई बड़े और विवादित बयान दिए हैं। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना इस पूरे संघर्ष का मुख्य उद्देश्य था और अब तेहरान इस बात पर सहमत हो चुका है कि वह न्यूक्लियर हथियार नहीं रखेगा। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान की सैन्य क्षमता अब काफी कमजोर हो चुकी है।
ईरान-इजरायल तनाव पर ट्रंप का बयान
न्यूयॉर्क पोस्ट के पॉडकास्ट ‘पॉड फोर्स वन’ में बातचीत के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका को ईरान में जमीन पर सेना भेजने की जरूरत नहीं पड़ी। उनके अनुसार अमेरिकी एयरफोर्स की कार्रवाई ने ईरान की सैन्य ताकत को भारी नुकसान पहुंचाया है और देश की सैन्य स्थिति काफी हद तक कमजोर हो गई है।
‘ईरान की सेना खत्म हो चुकी है’ – ट्रंप का दावा
ट्रंप ने इंटरव्यू में यह भी कहा कि ईरान की सेना लगभग खत्म हो चुकी है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान की स्थिति इतनी कमजोर हो गई है कि अब वह किसी बड़े सैन्य टकराव की स्थिति में नहीं है।
नेतन्याहू को फटकार लगाने का खुलासा
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को लेकर ट्रंप ने कहा कि लेबनान मुद्दे पर उन्होंने उन्हें कड़ी फटकार लगाई थी। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान पर हमले के फैसले में नेतन्याहू के किसी प्रभाव या दबाव की बात गलत है और यह निर्णय स्वतंत्र रूप से लिया गया था।
खामेनेई से मुलाकात की इच्छा जताई
सबसे चौंकाने वाले बयान में ट्रंप ने कहा कि वह ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई से मुलाकात करना चाहेंगे। उन्होंने कहा कि किसी न किसी मोड़ पर यह मुलाकात संभव हो सकती है और वह इस संभावना को नकार नहीं रहे हैं।
न्यूक्लियर मुद्दे पर ट्रंप का दावा
ट्रंप ने कहा कि इस पूरे संघर्ष का सबसे बड़ा उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना था, और अब हालात ऐसे बन चुके हैं कि ईरान ने इस दिशा में पीछे हटने पर सहमति जताई है।
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