‘नेकी कर दरिया में डाल…’: यूपी चुनाव से पहले मोहन भागवत का कार्यकर्ताओं को ‘महामंत्र’, बोले- पद और टिकट की चाह छोड़ देश के लिए जुटें

मेरठ/लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों की आहट के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कार्यकर्ताओं में नए जोश का संचार किया है। मेरठ में आयोजित एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम के दौरान भागवत ने स्वयंसेवकों को ‘निस्वार्थ सेवा’ का पाठ पढ़ाया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि संघ का काम किसी पद या प्रतिष्ठा के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के लिए होना चाहिए। भागवत का यह संबोधन आगामी चुनावों और संघ के शताब्दी वर्ष के मद्देनजर बेहद अहम माना जा रहा है।

टिकट और सीट की होड़ से दूर रहने की नसीहत

कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए संघ प्रमुख ने ‘नेकी कर दरिया में डाल’ (संबोधन में ‘कुएं में डाल’ का जिक्र) का मंत्र दिया। उन्होंने कहा, “आप जो भी अच्छा काम करें, उसे पूरी प्रमाणिकता और निस्वार्थ भाव से करें। इसमें न तो टिकट मांगने की मंशा होनी चाहिए और न ही किसी खास सीट की चाह।” भागवत ने जोर देकर कहा कि अगर कोई व्यक्ति संघ का नाम जाने बिना भी देश के लिए उत्कृष्ट कार्य (Excellence) कर रहा है, तो उसे संघ का सदस्य माना जाना चाहिए। उनका इशारा साफ था कि सेवा का फल मांगने की अपेक्षा सेवा भाव ही सर्वोपरि है।

जाति व्यवस्था अब ‘अव्यवस्था’ बन चुकी है

इससे पहले लखनऊ में सामाजिक समरसता पर बात करते हुए मोहन भागवत ने जातिवाद पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि जाति कोई शाश्वत व्यवस्था नहीं है, बल्कि वर्तमान समय में यह एक ‘अव्यवस्था’ का रूप ले चुकी है। भागवत ने कहा, “पुराने समय में यह कार्य पर आधारित थी, लेकिन आज हर व्यक्ति हर काम कर सकता है। जाति की दीवारें अब ढह रही हैं और युवाओं का नजरिया बदल रहा है।” उन्होंने आह्वान किया कि ‘हम सब हिंदू हैं’ की एक बड़ी लकीर खींचकर छुआछूत और जातीय विभाजन को जड़ से समाप्त करना होगा।

आधुनिकीकरण मंजूर, लेकिन पश्चिमीकरण का अंधानुकरण नहीं

आधुनिकता और परंपरा के संतुलन पर संघ प्रमुख ने अपना दृष्टिकोण स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि आधुनिकीकरण एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है और इसका विरोध नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि, उन्होंने ‘पश्चिमीकरण’ के अंधानुकरण के प्रति आगाह किया। भागवत ने कहा, “जो नया है, उसे परख कर स्वीकार करें। शाश्वत मूल्यों के अनुरूप किया गया परिवर्तन ही समाज के लिए हितकारी होता है।” उन्होंने यह भी विश्वास जताया कि यदि समाज जागृत और समरस रहेगा, तो राजनीति की विकृतियां अपने आप खत्म हो जाएंगी।

उत्तराखंड में 1,000 हिंदू सम्मेलनों का लक्ष्य

संघ की भविष्य की योजनाओं का जिक्र करते हुए बताया गया कि मोहन भागवत 22 और 23 फरवरी को उत्तराखंड के प्रवास पर रहेंगे। आरएसएस के स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में मनाए जा रहे शताब्दी वर्ष के तहत उत्तराखंड में व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। संघ ने पूरे प्रदेश में 1,000 हिंदू सम्मेलन आयोजित करने का विशाल लक्ष्य रखा है, ताकि हिंदू समाज को एकजुट कर राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।

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