
लंदन: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत के प्रस्तावित ब्रिटेन दौरे को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। ब्रिटेन के 15 नागरिक संगठनों और सामाजिक समूहों ने लंदन के मेयर सादिक खान को पत्र लिखकर भागवत से जुड़े किसी भी कार्यक्रम के लिए ग्रेटर लंदन अथॉरिटी (GLA) के स्वामित्व या नियंत्रण वाले स्थल उपलब्ध नहीं कराने की मांग की है। संगठनों ने यह भी कहा है कि मेयर या उनकी ओर से कोई प्रतिनिधि RSS से जुड़े कार्यक्रम में शामिल न हो।
भागवत के ब्रिटेन दौरे से पहले बढ़ा विरोध
मोहन भागवत अमेरिका और कनाडा की यात्रा के बाद ब्रिटेन पहुंचने वाले हैं। उनके दौरे के मद्देनजर ही इन संगठनों ने लंदन के मेयर को पत्र भेजा है। पत्र में RSS को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं और संगठन की विचारधारा तथा उसके सामाजिक प्रभाव पर सवाल उठाए गए हैं।
संगठनों का कहना है कि लंदन प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि GLA के अधिकार क्षेत्र में आने वाला कोई भी स्थल RSS प्रमुख के कार्यक्रम के लिए उपलब्ध नहीं कराया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने मेयर कार्यालय से किसी भी तरह के आधिकारिक समर्थन या प्रतिनिधित्व से भी दूरी बनाए रखने की मांग की है।
संगठनों ने RSS पर लगाए गंभीर आरोप
पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले समूहों ने RSS को एक ‘सत्तावादी और सैन्यवादी’ संगठन बताते हुए दावा किया कि इसकी विचारधारा का संबंध यूरोप में उभरी फासीवादी विचारधाराओं से रहा है। संगठनों ने RSS और उससे जुड़े संगठनों पर भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों तथा अन्य वंचित समुदायों के खिलाफ भेदभाव और हिंसा से जुड़े आरोप भी लगाए हैं।
हालांकि, ये आरोप पत्र लिखने वाले संगठनों के दावे हैं। इन्हें स्वतंत्र रूप से सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। RSS की ओर से मोहन भागवत के विदेशी दौरों में अलग-अलग मंचों पर सामाजिक एकता, विविधता और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का संदेश दिया गया है।
अमेरिका और कनाडा के बाद ब्रिटेन में भी विरोध
मोहन भागवत के विदेश दौरे के दौरान अमेरिका में भी उनके कार्यक्रम को लेकर विरोध देखने को मिला था। न्यूयॉर्क में आयोजित कार्यक्रम से पहले कई नागरिक और धार्मिक संगठनों ने इसका विरोध किया था। इसके बावजूद भागवत ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया और मानवता तथा सामाजिक एकता पर जोर दिया।
कनाडा में भी भागवत ने हिंदू समुदाय को संबोधित करते हुए ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की अवधारणा पर जोर दिया। उन्होंने विविध भाषाओं, परंपराओं और पूजा पद्धतियों को समाज की एकता के लिए महत्वपूर्ण बताया।
लंदन के मेयर से क्या मांग की गई?
लंदन मेयर सादिक खान को भेजे गए पत्र में मुख्य तौर पर मांग की गई है कि RSS से जुड़े किसी भी कार्यक्रम के लिए GLA के स्वामित्व वाले स्थान उपलब्ध न कराए जाएं। इसके अलावा मेयर या GLA के किसी प्रतिनिधि की ओर से ऐसे कार्यक्रम में भागीदारी, समर्थन संदेश या आधिकारिक उपस्थिति नहीं होनी चाहिए।
रिपोर्ट के मुताबिक, पत्र लिखने वाले समूहों ने लंदन में समुदायों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठाए हैं और RSS से जुड़े संगठनों की गतिविधियों के बीच संभावित सामाजिक तनाव को लेकर प्रशासन से स्पष्टता मांगी है।
15 संगठनों की चिट्ठी से क्या संदेश?
भागवत के ब्रिटेन दौरे से पहले सामने आई यह चिट्ठी बताती है कि उनकी यात्रा को लेकर ब्रिटेन में भी राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। एक तरफ RSS प्रमुख अपने अंतरराष्ट्रीय दौरे के दौरान हिंदू समुदाय, भारतीय संस्कृति और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का संदेश दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ ब्रिटिश नागरिक संगठन RSS की विचारधारा और गतिविधियों को लेकर आपत्ति दर्ज करा रहे हैं।
मोहन भागवत का ब्रिटेन दौरा ऐसे समय हो रहा है जब RSS अपने शताब्दी वर्ष में वैश्विक स्तर पर भारतीय मूल के समुदायों और व्यापक समाज तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में लंदन में उनके कार्यक्रम को लेकर उठी आपत्तियां इस दौरे को लेकर चर्चा को और बढ़ा सकती हैं।
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