लखनऊ। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर राजधानी लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जल संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और सरकारी योजनाओं के संरक्षण को लेकर लोगों से सक्रिय भागीदारी की अपील की। इस दौरान उन्होंने हर घर नल योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहा है या टोटी चोरी कर रहा है, तो समाज का दायित्व है कि उसे रोका जाए।
हर घर नल योजना का किया जिक्र
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के लिए बड़े स्तर पर कार्य किया गया है। इसके तहत हजारों गांवों और लाखों परिवारों को नल से जल उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कई स्थानों से ऐसी शिकायतें सामने आती हैं कि नलों की टोटियां चोरी हो जाती हैं या जानबूझकर उन्हें क्षतिग्रस्त किया जाता है, जिससे सरकारी संसाधनों की हानि होती है और आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
‘पानी की बर्बादी रोकना सभी की जिम्मेदारी’
सीएम योगी ने कहा कि केवल सरकार की योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका संरक्षण भी समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति टोटी चोरी करता दिखाई दे या नल खुला छोड़कर पानी बर्बाद कर रहा हो, तो उसे समझाया और रोका जाना चाहिए। जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने की आवश्यकता है ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों को सुरक्षित रखा जा सके।
उन्होंने कहा कि पानी की एक-एक बूंद का महत्व समझना होगा। यदि सभी नागरिक अपने स्तर पर जागरूकता दिखाएं, तो जल संकट जैसी चुनौतियों से काफी हद तक निपटा जा सकता है।
पर्यावरण संरक्षण के लिए दिलाया संकल्प
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री ने उपस्थित लोगों को पर्यावरण संरक्षण का संकल्प भी दिलाया। उन्होंने कहा कि जिस धरती और समाज ने हमें जीवन दिया है, उसके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना और अपने दायित्वों का निर्वहन करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।
सीएम योगी ने कहा कि प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा केवल सरकारी कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि यह प्रत्येक व्यक्ति की जीवनशैली का हिस्सा बननी चाहिए। उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक पौधारोपण करने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में योगदान देने की अपील की।
भगवान श्रीराम के उदाहरण से दिया संदेश
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भगवान श्रीराम के जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि लंका विजय के बाद भी प्रभु श्रीराम ने सोने की लंका में रहने की इच्छा नहीं जताई और अपनी जन्मभूमि अयोध्या लौट आए। उन्होंने कहा कि यह प्रसंग हमें अपनी मातृभूमि, समाज और पर्यावरण के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी का भाव सिखाता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अपनी जन्मभूमि और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। पर्यावरण की रक्षा और जल बचाने की दिशा में समाज की भागीदारी ही भविष्य को सुरक्षित बना सकती है।
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