
बीजिंग: दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और खुद को वैश्विक महाशक्ति के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा चीन कई क्षेत्रों में अपनी तकनीक और इंजीनियरिंग क्षमता से दुनिया को चौंकाता रहा है। लेकिन एक ऐसी नदी भी है, जिसने सदियों से चीन की सबसे बड़ी परेशानियों में अपनी जगह बनाए रखी है। यह नदी सिर्फ प्राकृतिक धरोहर ही नहीं, बल्कि चीन के इतिहास में विनाश और तबाही का प्रतीक भी मानी जाती है। यही वजह है कि इसे ‘चीन का शोक’ (China’s Sorrow) कहा जाता है। इस नदी का नाम हुआंग हे (Yellow River) है।
हुआंग हे नदी का रंग पीला क्यों दिखाई देता है?
उत्तरी चीन में बहने वाली हुआंग हे नदी को दुनिया भर में येलो रिवर (Yellow River) या पीली नदी के नाम से भी जाना जाता है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA के अनुसार, जब यह नदी उत्तर-पश्चिमी चीन के लोएस पठार (Loess Plateau) से होकर गुजरती है, तब अपने साथ भारी मात्रा में पीली बारीक मिट्टी यानी लोएस बहाकर ले आती है। यही मिट्टी नदी के पानी को पीला और गेरुआ रंग प्रदान करती है। हर वर्ष लाखों टन गाद इस नदी में मिलती है, जिसके कारण इसे दुनिया की सबसे अधिक गाद वाली नदियों में गिना जाता है।
चीन की दूसरी सबसे लंबी नदी है हुआंग हे
हुआंग हे चीन की दूसरी सबसे लंबी नदी है। इसकी कुल लंबाई करीब 5,664 किलोमीटर मानी जाती है। इसका उद्गम चीन के क्विंघाई प्रांत स्थित बयान हार पर्वत से होता है और यह आगे चलकर बोहाई सागर में जाकर मिलती है। इतिहासकारों के अनुसार, इसी नदी के किनारे चीन की प्राचीन सभ्यता का विकास हुआ था। इसी कारण इसे ‘चीनी सभ्यता का पालना’ भी कहा जाता है।
क्यों कहा जाता है ‘चीन का शोक’?
हुआंग हे नदी को ‘चीन का शोक’ या China’s Sorrow कहे जाने के पीछे इसकी विनाशकारी बाढ़ों का लंबा इतिहास है। इस नदी में भारी मात्रा में गाद जमा होने से इसका तल लगातार ऊपर उठता रहता है। परिणामस्वरूप, कई बार नदी अपने किनारों को तोड़कर आसपास के इलाकों में तबाही मचा देती है।
इतिहास में इस नदी ने कई बार अपना मार्ग भी बदल दिया, जिससे लाखों लोगों का जीवन प्रभावित हुआ। अनेक ऐतिहासिक बाढ़ों में भारी जनहानि हुई और खेती, गांवों तथा शहरों को व्यापक नुकसान पहुंचा। इसी वजह से यह नदी चीन के लिए विकास के साथ-साथ एक स्थायी चुनौती भी बनी हुई है।
इंजीनियरिंग में आगे, लेकिन नदी पर पूरी तरह नहीं मिली जीत
चीन ने पिछले कई दशकों में बांध, तटबंध, जल प्रबंधन परियोजनाओं और आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों के जरिए हुआंग हे नदी को नियंत्रित करने के बड़े प्रयास किए हैं। इसके बावजूद नदी में जमा होने वाली अत्यधिक गाद और समय-समय पर आने वाली बाढ़ आज भी प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनी रहती है। यही कारण है कि तकनीकी रूप से सक्षम होने के बावजूद चीन इस नदी के खतरे को पूरी तरह समाप्त नहीं कर पाया है।
चीन के इतिहास और वर्तमान दोनों में अहम है हुआंग हे
हुआंग हे नदी एक ओर चीन की सभ्यता, कृषि और सांस्कृतिक विकास की आधारशिला रही है, वहीं दूसरी ओर इसने इतिहास में कई बार विनाश का भी कारण बनकर अपनी अलग पहचान बनाई है। इसलिए यह नदी चीन के लिए गर्व और चिंता—दोनों का प्रतीक मानी जाती है। इसी विरोधाभास के कारण इसे दुनिया भर में ‘चीन का शोक’ के नाम से जाना जाता है।
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