काठमांडू: भारत और चीन के बीच रणनीतिक रूप से बेहद अहम माने जाने वाले नेपाल में अमेरिका की सक्रियता अचानक तेज हो गई है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन लगातार नेपाल में अपनी मौजूदगी मजबूत करने में जुटा है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी एक के बाद एक नेपाल पहुंच रहे हैं, जिससे चीन की चिंता भी बढ़ने लगी है। खासतौर पर नेपाल में रह रहे तिब्बती शरणार्थियों को लेकर बीजिंग अलर्ट मोड में आ गया है।
नेपाल में जेन जी राजनीति और रैपर से नेता बने बालेन शाह के प्रधानमंत्री बनने के बाद अमेरिकी गतिविधियों में तेजी साफ दिखाई दे रही है। अब अमेरिका की अब तक की सबसे वरिष्ठ अधिकारी मानी जा रहीं यूएस अंडर सेक्रेटरी ऑफ स्टेट फॉर पब्लिक डिप्लोमेसी सारा बी रोजर्स तीन दिवसीय नेपाल दौरे पर आने वाली हैं। नेपाली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वह शनिवार 30 मई को काठमांडू पहुंचेंगी।
बालेन शाह सरकार के बाद बढ़ी अमेरिकी दिलचस्पी
नेपाल में नई राजनीतिक परिस्थितियों के बीच अमेरिका की दिलचस्पी तेजी से बढ़ी है। काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार बालेन शाह के प्रधानमंत्री बनने के बाद यह किसी अमेरिकी वरिष्ठ अधिकारी का सबसे बड़ा दौरा माना जा रहा है। इससे पहले अमेरिका की ओर से समीर पॉल और भारत में अमेरिकी राजदूत सर्गियो गोर भी नेपाल का दौरा कर चुके हैं।
बताया जा रहा है कि सारा बी रोजर्स इन दोनों अधिकारियों से कहीं ज्यादा वरिष्ठ हैं और उनका नेपाल दौरा रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। नेपाल के विदेश मंत्रालय ने इस दौरे की जानकारी गृह मंत्रालय को भी दे दी है। ऐसे में नेपाल की राजनीति और विदेश नीति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
चीन क्यों हुआ सतर्क?
नेपाल में अमेरिकी अधिकारियों की लगातार बढ़ती आवाजाही से चीन असहज नजर आ रहा है। दरअसल चीन को आशंका है कि नेपाल में रह रहे बड़ी संख्या में तिब्बती शरणार्थी अमेरिका के साथ मिलकर उसके खिलाफ गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं। तिब्बत और दलाई लामा का मुद्दा पहले से ही अमेरिका और चीन के रिश्तों में तनाव की बड़ी वजह रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नेपाल दक्षिण एशिया में चीन और अमेरिका के बीच नई रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का केंद्र बनता जा रहा है। चीन लंबे समय से नेपाल में अपना प्रभाव बनाए रखने की कोशिश करता रहा है, लेकिन अब अमेरिका की बढ़ती सक्रियता से शक्ति संतुलन बदलने के संकेत मिलने लगे हैं।
समीर पॉल और रबी लामिछाने की मुलाकात भी रही चर्चा में
इससे पहले 20 अप्रैल को अमेरिकी अधिकारी समीर पॉल ने नेपाल का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रीय स्वतंत्रता पार्टी के अध्यक्ष रबी लामिछाने से मुलाकात की थी। इस मुलाकात के बाद नेपाल में अमेरिकी दखल और राजनीतिक समीकरणों को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं।अब सारा बी रोजर्स की यात्रा को उसी कड़ी का अगला बड़ा कदम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि अमेरिका नेपाल में अपनी कूटनीतिक पकड़ मजबूत करने के साथ-साथ चीन के प्रभाव को संतुलित करने की रणनीति पर काम कर रहा है।
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