
नई दिल्ली। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच एक नई बहस छिड़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की हालिया रणनीति केवल यूक्रेन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए वे एक साथ कई भू-राजनीतिक मोर्चों पर बढ़त बनाने की कोशिश कर रहे हैं। खासतौर पर ईरान के साथ उनके रिश्तों और युद्ध के दौरान मिली मदद को लेकर नई चर्चाएं तेज हो गई हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार चेलानी ने दावा किया है कि यूक्रेन युद्ध के शुरुआती वर्षों में ईरान ने रूस की बड़ी मदद की थी। उनका कहना है कि उस समय ईरान ने रूस को 50 हजार से अधिक ‘शाहिद’ ड्रोन उपलब्ध कराए थे, जिसने युद्ध के मैदान में रूसी सेना की मारक क्षमता को काफी बढ़ा दिया।
यूक्रेन युद्ध में ‘शाहिद’ ड्रोन की अहम भूमिका
विशेषज्ञों के मुताबिक ईरान द्वारा उपलब्ध कराए गए शाहिद ड्रोन रूस के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हुए। ये ड्रोन लंबी दूरी तक जाकर लक्ष्य पर हमला करने में सक्षम हैं और अपेक्षाकृत कम लागत में बड़े नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखते हैं। यही कारण है कि रूस ने इन्हें यूक्रेन के कई महत्वपूर्ण ठिकानों पर हमले के लिए इस्तेमाल किया।
विश्लेषकों का कहना है कि इन ड्रोन के कारण रूस को युद्ध में रणनीतिक बढ़त मिली। यूक्रेन की सैन्य संरचना और ऊर्जा ढांचे पर हमलों में इनका व्यापक इस्तेमाल देखा गया।
क्या अब ईरान का कर्ज चुका रहे हैं पुतिन?
चेलानी के मुताबिक अब सवाल उठ रहा है कि क्या रूस उसी मदद का बदला चुकाने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। माना जा रहा है कि रूस की हालिया कूटनीतिक और सैन्य चालें ईरान के हितों को भी साधने की कोशिश हो सकती हैं।
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि पुतिन की रणनीति केवल यूक्रेन के खिलाफ नहीं है, बल्कि इसके जरिए वे अमेरिका और यूरोप पर भी दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इस तरह एक ही कदम से वे तीन बड़े वैश्विक खिलाड़ियों को चुनौती देने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
वैश्विक राजनीति में बढ़ती नई ध्रुवीकरण की आहट
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का कहना है कि रूस, ईरान और चीन जैसे देशों के बीच बढ़ती नजदीकियां वैश्विक राजनीति में नए ध्रुवीकरण का संकेत दे रही हैं। यूक्रेन युद्ध ने दुनिया को पहले ही कई खेमों में बांट दिया है और अब यह रणनीतिक गठजोड़ भविष्य की भू-राजनीतिक दिशा तय कर सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में रूस की रणनीति और ईरान के साथ उसका सहयोग वैश्विक सुरक्षा और पश्चिमी देशों की नीतियों को भी प्रभावित कर सकता है। यही वजह है कि इस मुद्दे पर दुनिया भर के रणनीतिक विश्लेषकों की नजर बनी हुई है।
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