सावधान! अभी न खरीदें सोना, पेट्रोल-डीजल के उपयोग पर भी लगाम लगाएं; 24 घंटे में PM मोदी की देशवासियों से दूसरी बड़ी अपील

नई दिल्ली/वड़ोदरा: पश्चिम एशिया (Middle East) में गहराते युद्ध के बादलों और वैश्विक अस्थिरता के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को बड़े आर्थिक संकट के प्रति आगाह किया है। 24 घंटे के भीतर दूसरी बार प्रधानमंत्री ने जनता से सीधा संवाद करते हुए ‘सोना न खरीदने’ और ‘पेट्रोल-डीजल’ का सीमित इस्तेमाल करने की भावुक अपील की है। पीएम मोदी ने साफ कहा कि मौजूदा वैश्विक हालातों को देखते हुए हमें अपनी उन आदतों पर अंकुश लगाना होगा, जिससे देश की विदेशी मुद्रा (Foreign Exchange) बाहर जाती है।

वड़ोदरा से पीएम मोदी का सीधा संदेश: ‘संसाधनों की बचत है अनिवार्य’

गुजरात के वड़ोदरा में ‘सरदारधाम हॉस्टल’ के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने देश की आर्थिक सेहत को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर कीं। उन्होंने कहा कि दुनिया इस समय एक के बाद एक संकटों से जूझ रही है। पहले कोरोना महामारी, फिर वैश्विक मंदी और अब पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिला रहा है। पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि इन चुनौतियों का भारत पर कम से कम असर हो, इसके लिए देश के प्रत्येक नागरिक को अपना दायित्व निभाना होगा।

विदेशी मुद्रा बचाने के लिए ‘गोल्ड’ और ‘फ्यूल’ पर कंट्रोल जरूरी

प्रधानमंत्री ने देशवासियों से उन उत्पादों के उपयोग को कम करने का आग्रह किया, जिनका आयात विदेशों से किया जाता है। उन्होंने विशेष रूप से सोने (Gold) के प्रति भारतीयों के लगाव को फिलहाल टालने और वाहनों का उपयोग समझदारी से करने को कहा ताकि पेट्रोल-डीजल की खपत घटाई जा सके। पीएम मोदी के मुताबिक, इन दोनों ही चीजों के आयात पर भारत को भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ती है। अगर जनता इनका उपयोग कम करती है, तो देश के खजाने पर पड़ने वाले बोझ को कम किया जा सकता है।

24 घंटे में दूसरी अपील: रविवार को हैदराबाद, सोमवार को वड़ोदरा

यह गौर करने वाली बात है कि पीएम मोदी ने महज एक दिन के अंतराल में यह दूसरी बार अपील की है। इससे पहले रविवार को हैदराबाद की रैली में भी उन्होंने वैश्विक संकट का हवाला देते हुए सोना न खरीदने, ईंधन बचाने और फिलहाल विदेश यात्राओं (Foreign Trips) से बचने की सलाह दी थी। सोमवार को वड़ोदरा में उन्होंने फिर दोहराया कि जैसे हमने एकजुट होकर कोरोना का मुकाबला किया था, वैसे ही इस दशक के इस सबसे बड़े आर्थिक संकट से भी पार पाना होगा।

ऐतिहासिक संकट की तुलना: युद्ध जैसे हालात

प्रधानमंत्री ने पूर्व के दशकों का उदाहरण देते हुए कहा कि जब भी देश युद्ध या किसी बड़े संकट से गुजरा है, नागरिकों ने सरकार की अपील पर अपने संसाधनों का त्याग किया है। आज फिर वैसी ही जरूरत है। उन्होंने कहा कि सरकार अपने स्तर पर लगातार प्रयास कर रही है कि महंगाई और आपूर्ति शृंखला पर युद्ध का असर न पड़े, लेकिन इसमें जनता की भागीदारी भी उतनी ही आवश्यक है।

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