Bangladesh Terror Camps: क्या भारत के ‘चिकन नेक’ पर मंडरा रहा है खतरा? पूर्व रॉ एजेंट के दावों से बढ़ी सुरक्षा चिंता

नई दिल्ली: भारत के रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) को लेकर एक बार फिर सुरक्षा चिंताएं तेज हो गई हैं। खुफिया एजेंसी रॉ (RAW) के पूर्व एजेंट लकी बिष्ट ने दावा किया है कि बांग्लादेश के विभिन्न इलाकों में कथित तौर पर ऐसे आतंकी प्रशिक्षण शिविर संचालित हो रहे हैं, जहां भारत विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

पूर्व रॉ एजेंट का दावा, बांग्लादेश में चल रहे हैं कई कथित आतंकी कैंप

पूर्व रॉ एजेंट लकी बिष्ट ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए अपने बयान में आरोप लगाया कि बांग्लादेश के अलग-अलग क्षेत्रों में कथित आतंकी प्रशिक्षण शिविर सक्रिय हैं। उनके अनुसार इन शिविरों में पाकिस्तान के सैन्य अधिकारियों और आईएसआई (ISI) की कथित भूमिका भी है, जहां आतंकियों को प्रशिक्षण दिए जाने का दावा किया गया है।

लकी बिष्ट ने यह भी कहा कि वर्ष 2025 में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के प्रमुख आसिम मलिक ने बांग्लादेश यात्रा के दौरान कथित तौर पर इन शिविरों का गोपनीय दौरा किया था। हालांकि, इस संबंध में भारत, बांग्लादेश या पाकिस्तान की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।

किन इलाकों का किया गया जिक्र?

पूर्व रॉ एजेंट ने अपने दावों में बांग्लादेश के चार क्षेत्रों का उल्लेख किया है, जहां कथित रूप से अलग-अलग आतंकी संगठनों की गतिविधियां होने का आरोप लगाया गया है।

रंगपुर: यह इलाका भारत के सिलीगुड़ी कॉरिडोर के सबसे निकट माना जाता है, इसलिए इसे रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील बताया गया है।

चटगांव हिल ट्रैक्ट्स: दावा किया गया है कि इस क्षेत्र में कथित रूप से हरकत-उल-जिहाद-अल-इस्लामी बांग्लादेश (HuJI-B) और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े तत्व सक्रिय हैं।

सिलहट: यहां अल-कायदा से जुड़े बताए जाने वाले संगठन अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (ABT) के कथित गुप्त ठिकानों का जिक्र किया गया है।

नेत्रोकोना: इस इलाके में आईएसआईएस समर्थक बताए जाने वाले जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (JMB) और नव-जेएमबी की कथित गतिविधियों का दावा किया गया है।

भारत के लिए क्यों बेहद अहम है ‘चिकन नेक’?

सिलीगुड़ी कॉरिडोर, जिसे आमतौर पर ‘चिकन नेक’ कहा जाता है, भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और सामरिक दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में गिना जाता है। पश्चिम बंगाल में स्थित यह संकरा भूभाग देश के मुख्य हिस्से को पूर्वोत्तर के आठ राज्यों से जोड़ता है।

इस कॉरिडोर की सबसे संकरी चौड़ाई लगभग 22 किलोमीटर बताई जाती है। यही कारण है कि सुरक्षा विशेषज्ञ इसे भारत के सबसे संवेदनशील इलाकों में शामिल करते हैं।

इन आठ राज्यों की लाइफलाइन है सिलीगुड़ी कॉरिडोर

सिलीगुड़ी कॉरिडोर के माध्यम से अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा देश के बाकी हिस्सों से जुड़े हुए हैं। रक्षा और लॉजिस्टिक्स के लिहाज से भी यह मार्ग अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षेत्र की सुरक्षा में किसी भी प्रकार की चुनौती का असर पूर्वोत्तर भारत की कनेक्टिविटी और रणनीतिक तैयारियों पर पड़ सकता है। इसी वजह से इस कॉरिडोर से जुड़ी किसी भी सुरक्षा सूचना को गंभीरता से देखा जाता है।

आधिकारिक पुष्टि का इंतजार

फिलहाल बांग्लादेश में कथित आतंकी शिविरों और सिलीगुड़ी कॉरिडोर को लेकर लगाए गए दावों की किसी सरकारी एजेंसी या आधिकारिक स्रोत से पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में इन दावों को स्वतंत्र रूप से सत्यापित किया जाना बाकी है। सुरक्षा एजेंसियां समय-समय पर सीमा क्षेत्रों और रणनीतिक स्थानों की निगरानी करती रहती हैं।

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